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मनमोहन आओ जी
मनमोहन आओ जी, रो रो पुकारे बिरहिन राधिका
मनमोहन आओ जी, रो रो पुकारे बिरहिन राधिका
मनमोहन आओ जी
आकुल मन भयो व्याकुल तन भयो
बरसत नैन हमार, मुरारी बरसत नैन हमार
आश निराश भयी अब मन की
आश निराश भयी अब मन की
तुम बिन कौन आधार
मनमोहन तुम बिन कौन आधार
मनमोहन आओ जी, रो रो पुकारे बिरहिन राधिका
मनमोहन आओ जी
सावन बित्ता फागुन बीता बीते माघ कुआर
मुरारी बीते माघ कुआर
बचपन बीता यौवन बीता , बीते बरस हजार
मुरारी बीते बरस हजार
बात ताकत पथरा गईं आँखियाँ
बात ताकत पथरा गईं आँखियाँ
दर्शन भए न तिहार
मनमोहन दर्शन भए न तिहार
मनमोहन आओ जी, रो रो पुकारे बिरहिन राधिका
मनमोहन आओ जी, मनमोहन आओ जी
मनमोहन आओ जी, मनमोहन आओ जी