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कल की रात
कल की रात गिरी थी शबनम
कल की रात
कल की रात गिरी थी शबनम
हौले हौले कलियो के बंद होंठो पर
बरसी थी शबनम
कल की रात
फुलो के रुखसारो से रुखसार मिलकर
नीली रात की चुनरी के साए मे शबनम
परियो के अफ़सानो के पर खोल रहे थे
कल की रात कल की रात
कल की रात
दिल की मद्धम मद्धम हुलचल मे दो रूहे तेर रही थी
जैसे अपने नाज़ुक पँखो पर
आकाश को तौल रही हो
आकाश को तौल रही हो
कल की रात
कल की रात बड़ी उजली थी
कल की रात उजले थे सपने
कल की रात तेरे संग गुज़री
कल की रात कल की रात
कल की रात कल की रात
कल की रात
कल की रात कल की रात
कल की रात कल की रात
कल की रात कल की रात
कल की रात