Elige una pista para reproducir
कवी राजा अब्ब कविता के कान मरोडो
धंदे की कुछ बात करो
कुछ पैसे जोड़ो
शेर शायरी कवी राजा ना काम आएगी
कविता की पोथी को दीमक खा जायेगी
भाव चढ़ रहे अनाज महँगा हो रहा दिन दिन
भूखे मरोगे रात कटेगी तारे गिन गिन
इसीलिए यह कहता हु यह सब छोडो
धंदे की कुछ बात करो कुछ पैसे जोड़ो
अरे छोड़ो कलम मत चलो कविता की चाकी
घर की रोकड़ देखो कितने पैसे बाकी
अरे कितना घर में घी है कितना गरम मसाला
कितने पापड़ मूंगबडी मिर्च मसाला
कितना तेल नून मिर्च हल्दी और धनिया
कवी राजा चुपके से तुम बन जाओ बनिया
अरे पैसे पे रचो कवय भूक पेर गीत बनाओ
अरे पैसे पे रचो कवय भूक पेर गीत बनाओ
अरे गेहुं पेर हो ग़जल दहन के शेर सुनाऊं
नून मिर्च पर चौपाई चावल पैर हो दोहे
सुगाल कोयले पर कविता लिखो तोह सोहे
कम भाड़े की खोली पर लिखो कवाली
वाह वाह
कम भाड़े की खोली पर लिखो कवाली
जं जं करती कहॉ रुबाइ पैसे वाली
सब्दो का जंजाल बड़ा लफड़ा होता है
सब्दो का जंजाल बड़ा लफड़ा होता है
कवि सम्मेलन दोस्त बड़ा झगड़ा होता है
मुशायरे के शेरों पर रगड़ा होता
पैसे वाला शेर बड़ा तगड़ा होता है
है है है है हा
इसीलिये कहता हु ना इससे सेर फोड़ो
धंदे की कुछ बात करो कुछ पैसे जोड़ो