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दिल ले गया
दिल ले गया परदेसी, कोई रोक ना था
दिल ले गया परदेसी, कोई रोक ना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
ओ, क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
दिल ले गया परदेसी, कोई रोक ना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
ओ, क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
आग क्यूँ लगाए, ढोला, सर्द—सर्द पानी में?
क्यूँ मुझे जलाए ऐसे तू भरी जवानी में?
ओ, आग क्यूँ लगाए, ढोला, सर्द—सर्द पानी में?
क्यूँ मुझे जलाए ऐसे तू भरी जवानी में?
तनहा तड़प के ऐसे कहीं मर ना जाऊँ मैं
क्या है बेक़रारी मेरी, कैसे ये बताऊँ मैं?
क्या हो गया
क्या हो गया, कब, कैसे, मुझे होश ना था
क्या हो गया, कब, कैसे, मुझे होश ना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
एक—दूसरे को दिलबर ऐसे आज़माने में
उम्र बीत जाए ना यूँ रूठने—मनाने में
हाँ, एक—दूसरे को दिलबर ऐसे आज़माने में
उम्र बीत जाए ना यूँ रूठने—मनाने में
दूर जितना जाएगा तू, पास उतना आऊँगी
बाज़ुओं में तेरी सारी ज़िंदगी बिताऊँगी
चाहा तुझे
चाहा तुझे जो मैंने, मेरा दोष ना था
चाहा तुझे जो मैंने, मेरा दोष ना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
ओ, क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
दिल ले गया परदेसी, कोई रोक ना था
दिल ले गया परदेसी, कोई रोक ना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
ओ, क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था
ओ, क्या होगा, होगा, होगा? मेरा सोचना था