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रोते हैं नैनो में
लिए हुए अश्को के सैलाब
ढूँढते हैं पत्थरों पे
लिखे हुए तेरा ही नाम
सोते हैं सीने पे
लिए हुए चाँद का पहाड़
रोम रोम में सरकती है
तेरी ही याद, तेरी ही याद, तेरी ही याद
ऐ खुदा क्या गुस्ताखी थी
मेरी जो चुभती सज़ा दी
मोहब्बत में तन्हाई की
ऐसी गहरी फिजा दी
क्यों ज़िन्दगी में बेवक्त
इम्तिहान लेता है
दर्द भरी ज़ुबां पे
तेरी ही याद, तेरी ही याद
कहाँ है तेरा रहम-ओ-करम जो ढूँढता है सारा जहाँ
हाँ हाँ हाँ
कहाँ है तेरा रहम-ओ-करम
जो ढूँढती हैं ये अखियां
सोते हैं सीने पे
लिए हुए चाँद का पहाड़
रोम रोम में सरकती है
तेरी ही याद, तेरी ही याद, तेरी ही याद
तेरी ही याद, तेरी ही याद, तेरी ही याद
तेरी ही याद