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अलिफ मिया आज भी अपनी लाला को भुलाने के लिए इस
तवायफ की चौखट पर आए हो या आज कुछ और करने का इरादा है
तराना जी कौन कम वक्त उसे याद
करने के लिए आता है हम तो आपकी चौकट पर
उसे बुलाने के लिए आते हैं
भुलाना ही है तो और अच्छे तरीके है
हमारे पास
आप और आपकी बात राना जी बदलेंगे नहीं आप
या अल्लाह यह कैसी मोहब्बत है व इनसे
दूर है फिर भी यह जनाब है कि हमें अपने
पास नहीं आने देते लेकिन आज तो हम जान के ही रहेंगे ऐसे
भी क्या कहानी थी अलिफ लैला की
हमने उ फोन करा था
वो क्यों
कुछ सवाल बाकी रह गए थे कुछ जवाब बाकी रहे थे