Elige una pista para reproducir

हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
कपट को रंगे मानवा
परखत निकरा खोट
हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
कपट को रंगे मानवा
हा परखत निकरा खोट
हो हो हीरा तहाँ ना खोलिये
जहाँ कुंजड़ों की हाट
सहजे गाँठि बाँधी के
लगिये अपनी बात
हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
कपट को रंगे मानवा
परखत निकरा खोट
हो हो हीरा परा बाजार में
रहा छार लपटाय
केतिहे मूरख पची मुए
कोई पारखी लिया उठाय
हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
कपट को रंगे मानवा
परखत निकरा खोट