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मैं करता कर्म
जो होना वो होगा
मुझको लगता डर
अब मुश्किल है सोना
पूरे करता फ़र्ज़
नहीं करना समझौता
आँखें जाती भर
मैं फिर भी ना रोता
मैं करता कर्म
जो होना वो होगा
मुझको लगता डर
अब मुश्किल है सोना
पूरे करता फ़र्ज़
नहीं करना समझौता
आँखें जाती भर
मैं फिर भी ना रोता
पत्थर भी लगे मुझे सोना
कैसे करूँ मैं समझौता
जो पाया हूँ मैं ज़िंदगी में
वो मुझे आखिर में खोना
कौन मेरे साथ ना जानूँ मैं
जो मेरे ख़ास बस दिखा मैं
दो बजे रात में
कौन करे बात
जागता हूँ मैं
क्योंकि नींद मैंने खोया
सफलता मिले ना
फिर भी पूरे करता मैं फ़र्ज़
अगर मैं रोया
तो मेरे आँसू की कीमत होगी कोहिनूर
पन्नों पे लिखूँ
कलम बहने लगे खून
रहना चाहता मैं बहुत दूर
खिलना चाहता जैसे फूल
मुद्दा बने अब हम खुद
तुम्हारे लिए हम नहीं खूब
मैं करता कर्म
जो होना वो होगा
मुझको लगता डर
अब मुश्किल है सोना
पूरे करता फ़र्ज़
नहीं करना समझौता
आँखें जाती भर
मैं फिर भी ना रोता
मैं करता कर्म
जो होना वो होगा
मुझको लगता डर
अब मुश्किल है सोना
पूरे करता फ़र्ज़
नहीं करना समझौता
आँखें जाती भर
मैं फिर भी ना रोता
बातें नहीं करता इशारों में
कीमत नहीं जानो तुम बातों की
क्रांतिकारी को तुम पालोगे
तो क्रांति तुम खुद कैसे लाओगे?
थोड़ी सी मुश्किलों से
नहीं होती उदासी
गिर के हम उठे हर बार
लगे कुछ काला सा
देखे चेहरे मैंने लाखों में
देखा सन्नाटा तस्वीरों में
खुशी नहीं मिली आसानी से
तकदीर नहीं बदली बस बोलने से
अब नहीं लगता कुछ भी सच
टूटे वादे जैसे शीशे
देखे मैंने काफी रंग
गोली लगे हमें पीठ पे
फिर भी हमें खुद पे गर्व
झुके नहीं हम तो ढीठ हैं
मैं करता कर्म
जो होना वो होगा
मुझको लगता डर
अब मुश्किल है सोना
पूरे करता फ़र्ज़
नहीं करना समझौता
आँखें जाती भर
मैं फिर भी ना रोता