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ना कोई उदासी
ना अब रूह प्यासी
ना पीरी फ़कीरी
रिहाई असीरी
ना रिशतो की उलझन
ना अगनी ना चन्दन
ना कोई तमाशा
ना बातें ना भाषा
मै तेरे ज़हन के
अंधेरों में रोशन हूँ
जैसे जंगल में
जुगनू होते हैं
हम गुम है
अब ख़ुद में
तू और मैं
तेरे ज़हन के
अंधरों में रोशन हूँ
जैसे जंगल में जुगनू होते है
हम गुम है अब ख़ुद मैं
तू और मैं
जुगनू है
ना अपना पराया
उधारी बकाया
जहाँ हूँ वहा पे
ना साथी है साया
मै तेरे ज़हन के
अंधेरों में रोशन हूँ
जैसे जंगल में
जुगनू होते हैं
हम गुम है
अब ख़ुद में
तू और मैं
तेरे ज़हन के
अंधेरों में रोशन हूँ
जैसे जंगल में
जुगनू होते हैं
हम गुम है
अब ख़ुद में
तू और मैं जुगनू हैं तू और मैं
जुगनू हैं