दिल आख़िर दिल है, कुछ समझो
कोई ना भाए इसे, बस चाहे ये तुमको
यूँ है असर, मैं जाऊँ किधर?
ना ऐसे ख़्वाबों में आया करो
दिल आख़िर दिल है, कुछ तो समझो
छाए है ऐसा नशा कि होश ना हमको
यूँ है सुरूर, तुम्हारा क़सूर (तुम्हारा क़सूर)
ना ऐसे ख़्वाबों में आया करो
थोड़ी ख़ुशी, थोड़ा सा डर है
नहीं लगती देर इक दिल को टूटते हुए
हाँ, एक सपना है कोई होगा कल (होगा कल)
रह-रह के वो हो जाए कहाँ ओझल
क्या तुम ही वो हो? रहने दिल में आएगी जो
रहने दिल में, दिल में आएगी जो
हाँ, तुम मेरे हो, ख़ुद ये नहीं क्यूँ कहती हो?
तुम हो मेरी, अब ये कह भी दो
ये कैसा अनजाना सा एहसास है
समझकर भी क्यूँ ये दिल ना कुछ समझ सके?
ख़्वाबों की तस्वीरों में क्यूँ है हलचल? (हलचल)
रह-रह के याद आए कोई हर पल
क्या तुम ही वो हो? रहने दिल में आएगी जो
रहने दिल में, दिल में आएगी जो
हाँ, तुम मेरे हो, ख़ुद ये नहीं क्यूँ कहती हो?
तुम हो मेरी, अब ये कह भी दो
दिल आख़िर दिल है, कुछ तो समझो
कोई ना भाए इसे, बस चाहे ये तुमको
यूँ है असर, मैं जाऊँ किधर?
ना ऐसे ख़्वाबों में आया करो
ना ऐसे ख़्वाबों में आया करो