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साँसों में बड़ी बेक़रारी
आँखों में कई रत जगे
कहीं कभी लग जाए दिल
तो कहीं फ़िर दिल ना लगे
अपने दिल में ज़रा थाम लूँ
जादू का मैं इसे नाम दूँ
जादू कर रहा है...
जादू कर रहा है असर चुपके-चुपके
हो, दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुपके-चुपके
ऐसे भोले बनकर हैं बैठे
जैसे कोई बात नहीं
सब कुछ नज़र आ रहा है
दिन है ये, रात नहीं
क्या है कुछ भी नहीं है अगर
होंठों पे है खामोशी मगर
बातें कर रही है...
बातें कर रही है नज़र चुपके-चुपके
हो, दो दिल मिल रहे हैं, मगर चुपके-चुपके
सब को हो रही है...
हाँ, सब को हो रही है ख़बर चुपके-चुपके