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आह आह
भाई पेपर बढ़ा दे यार
येह you know me
Gloomy
आधी रात हुई मन बिचलन
जो आती सपनों में अब से निकली बदचलन
दर दर की ठोकर खानीयू
हुई मैं अब लोहे का स्तंभ
नहीं लगूँ मैं फिर जंक
नहीं करो मैं तुम तंग
नई आयु लेकर उमंग
आधी रात हुई मन बिचलन
जो आती सपनों में अब से निकली बदचलन
दर दर की ठोकर खानीयू
हुई मैं अब लोहे का स्तंभ
नहीं लगूँ मैं फिर जंक
नहीं करो मैं तुम तंग
हे हे
मैं आज एक बात बताऊँ
मैं तुम्हें एक राज़ बताऊँ
मैं रात्री चार घूम दूँ गाँव में भूत प्रीत साथ चलाऊँ
अये
याखी चा चिमटा बजाऊँ
आह
याखी चा भूत लगाऊँ
आह
मैं उत्तरकाशी को चुन भेजी
साथ विश्वनाथ भी चुन
जय हू
भेजी तू पेपर बना, तू पेपर बना
रेंडा नशा में चूर, अम दूया झाना
कलम चलदी रातों रात
सुबह ली मेरा गान बना, भेजी ताना बना
तू फिट निशाना बना
मैं मारूँ अंधेरी मार ना खबर ना सार
भेजी मैं सीधे कानू बना
मैं छोरा नरम मेरा खून गर्म
सूं सन्न में करूँ तेरू खेल खत्म
तेरा जानी कीड़ा करि मैं हजाम
जब लेंदू मैं दम तुम हुंडा भस्म
किस्मत भी ठीक न मेरा फूटी करम
आजकल हुई खफा मेरी सनम
वेके ही याद में दुखी भी हम
वेके ही याद में खींचूँ दम
मैं करूँ न-ना हमेशा हाँ
सच-साफ रही आधा काम में
सुनी मेना ताना करूँ बदनाम
बाता घरवाओं का सग्यान में
मन में दुखी, आँखों में आंसू
माजी भी मेरी होनी परेशान हाँ
बेटा जवान, बात मेरी मन
अम्म न खुश, तेरा ये काम न
भाई न गेम बनाई
भाई न मैं दिखाई
भाई न राह दिखाई
भाई न सीधे उत्तरी में
उत्तरी मैदान में ऐह
Gloomy
आधी रात हुई मन बिचलन
जो आती सपनों में अब से निकली बदचलन
दर दर की ठोकर खानीयू
हुई मैं अब लोहे का स्तंभ
नहीं लगूँ मैं फिर जंक
नहीं करो मैं तुम तंग
नई आयु लेकर उमंग
आधी रात हुई मन बिचलन
जो आती सपनों में अब से निकली बदचलन
दर दर की ठोकर खानीयू
हुई मैं अब लोहे का स्तंभ
नहीं लगूँ मैं फिर जंक
नहीं करो मैं तुम तंग
आह आह (Gloomy)
मैं आज एक बात बताऊँ