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Sencillo / Pista
क़ाबिल-ए-तारीफ़ है ये ज़िंदगी
हर पल सताती है, थकती नहीं
शातिर हूँ, मैं भी हूँ कुछ कम नहीं
अपने से लगते हैं ये ग़म सभी
ले चले अब ज़िंदगी चाहे जहाँ
हाँ, पीछे-पीछे चल पडूँगा मैं
सब मंज़ूर है, बोलो, चलना कहाँ?
अब कोई भी परवाह नहीं मुझे
बैठे हैं हम यहाँ सौ ज़ख़्म लिए
अब अपनी महफ़िल में कुछ कमी नहीं
वैसे बुलाया है सब को यहाँ
ये ख़ुशी ज़िद्दी है, आती नहीं
ले चले अब ज़िंदगी चाहे जहाँ
हाँ, पीछे-पीछे चल पडूँगा मैं
सब मंज़ूर है, बोलो, चलना कहाँ?
अब कोई भी परवाह नहीं मुझे
अँधेरों में (अँधेरों में)
जो मिला है (जो मिला है)
उजालों में मिला कभी नहीं
खो जाने में (खो जाने में)
जो मिला है (जो मिला है)
उलझनों में मिला कभी नहीं
हाँ, मिला (हाँ, मिला) कभी नहीं
ले चले अब ज़िंदगी चाहे जहाँ
हाँ, पीछे-पीछे चल पडूँगा मैं
सब मंज़ूर है, बोलो, चलना कहाँ?
अब कोई भी परवाह नहीं मुझे
ले चले अब ज़िंदगी चाहे जहाँ
हाँ, पीछे-पीछे चल पडूँगा मैं
सब मंज़ूर है, बोलो, चलना कहाँ?
अब कोई भी परवाह नहीं मुझे