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वह एक
जीना कल
किया चल
हे न हल
वह एक पल
जीना कल
किया चल
है न हल
पल किसी का नहीं हो कर रहता
दो मुँह का साप सब को डस्ता
कभी आगे चलता
कभी पीछे चलता
पल साला पल
एक पल
जीना कल
किया चल
है न हल
कोई खुद से बुरा नहीं होता
पल तोह किसी का
सगा नहीं होता
कभी हँसा देता
कभी रुला देता
पल साला पल
कम्बखत पल वह एक पल
सूअर पल जीना कल
खोटा पल किया चल
घंटा पल है न कल