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गुमसूँम है क्यूँ परेशान है क्यूँ
ए नूर के सागर तू हैरान है क्यूँ
मुझसे कहें ये खामोशियाँ
के छुपा लू तुझे अपनी बाहों में यू
के तेरे दिल को राहत दे सकूँ
के तेरी रूह तक पोहोचा दू सुकून
गुमसूँम है क्यूँ परेशान है क्यूँ
कहे बिन कहे जो आहों से
छुए बिन छुए हैं ऐसी वो
लिखी है जो बात आँखों में
पढ़े बिन पढ़ें है ऐसी वो
दिल तेरा दुखे तो मेरी पलकों पे
नमी सा एहसास है
गुमसूँम है क्यूँ परेशान है क्यूँ
ए नूर के सागर तू हैरान है क्यूँ
मुझसे कहें ये खामोशियाँ
के छुपा लू तुझे अपनी बाहों में यू
के तेरे दिल को राहत दे सकूँ
के तेरी रूह तक पोहोचा दू सुकून
के तेरे दिल को राहत दे सकूँ
के तेरी रूह तक पोहोचा दू सुकून