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कुछ तो वो याद की दहलीज़ से जाते भी नही
कुछ तो वो याद की दहलीज़ से जाते भी नही
और कुच्छ हम है उन्हे दिल से भुलाते भी नही
कुछ तो वो याद की
शब की आगोश में यादों का धुआँ उठता है
शब की आगोश में यादों का धुआँ उठता है
जब की हम जलते
जब की हम जलते चरगों को बुजाते भी नही
जब की हम जलते चरगों को बुजाते भी नही
कुछ तो वो याद की
ये शिकायत नही अफ़सोस की एक मंज़िल है
ये शिकायत नही अफ़सोस की एक मंज़िल है
खुद वो आते भी नही हाए
खुद वो आते भी नही हुमको बुलाते भी नही
खुद वो आते भी नही हुमको बुलाते भी नही
कुछ तो वो याद की
जाने दुनिया को खबर कैसे बिच्छाद ने की लगी
जाने दुनिया को खबर कैसे बिच्छाद ने की लगी
हम तो आँखों से
हम तो आँखों से कभी ाश्क़ बहते भी नही
हम तो आँखों से कभी ाश्क़ बहते भी नही
कुछ तो वो याद की दहलीज़ से जाते भी नही
और कुच्छ हम है उन्हे दिल से भुलाते भी नही
कुछ तो वो याद की दहलीज़ से जाते भी नही
कुछ तो वो याद की