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काली महाकाली काली महाकाली
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
काली महाकाली काली महाकाली
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
काली महाकाली काली महाकाली
पाँव पड़े शिव शंकर पर शर्माके जीभ निकाली
काली महाकाली काली महाकाली
शुंभ निशुंभ के दानव दल ने माँ दुर्गा को ललकारा था माँ
माँ दुर्गा को ललकारा था
माँ दुर्गा को ललकारा था
दानव दल का नाश किया माँ ने रूप अनोखा धारा था माँ ने
रूप अनोखा धारा था माँ ने
रूप अनोखा धारा था माँ ने
गिरा सती का बून्द पसीना
गिरा सती का बून्द पसीना प्रकटी माँ बिकराली
काली महाकाली काली महाकाली
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
काली महाकाली
काली महाकाली
चण्ड मुंड का मुंड काट कर पहने मुंडन माला माँ ने
पहने मुंडन माला माँ ने
पहने मुंडन माला माँ ने
हाथ काट के बुक्तांग छुपाये अद्द्भुत रूप निराला माँ का
अद्द्भुत रूप निराला माँ का
अद्द्भुत रूप निराला माँ का
दानव दल को मुख में भर के
दानव दल को मुख में भर के क्रोधित हो चबा डाली
काली महाकाली काली महाकाली
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
काली महाकाली
काली महाकाली
रक्त बीज का रक्त पी गयी डाल भवानी खप्पर में माँ
डाल भवानी खप्पर में माँ
डाल भवानी खप्पर में माँ
दानव सेना दर भागी पापी पड़ गए चक्क्र में सभी
पापी पड़ गए चक्क्र में सभी
पापी पड़ गए चक्क्र में सभी
वंश मिट का दानव दल का
वंश मिट का दानव दल का रण भूमि हुई खाली
काली महाकाली काली महाकाली
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
काली महाकाली
काली महाकाली
सती क्रोध से धरती काँपी तीन लोक डगमग डोले हां
तीन लोक डगमग डोले हां
तीन लोक डगमग डोले हां
डरे देवता करे प्राथना जय जय कार सभी बोले माँ की
जय जय कार सभी बोले माँ की
जय जय कार सभी बोले माँ की
रक्त को पीकर दानव दल का
रक्त को पीकर दानव दल का माँ हो गयी मतवाली
काली महाकाली काली महाकाली
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
काली महाकाली
काली महाकाली
जेष्ठ सदा शिव रण में सो गए चरण पड़े जब शंकर पर हां
चरण पड़े जब शंकर पर हां
चरण पड़े जब शंकर पर हां
क्रोध सती का शांत हो गया जीभ निकाली शर्माकर माँ ने
जीभ निकाली शर्माकर माँ ने
जीभ निकाली शर्माकर माँ ने
तीनो लोक में हुआ उजाला
तीनो लोक में हुआ उजाला रमेश बनाये दीवाली
काली महाकाली काली महाकाली
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते
काली महाकाली
काली महाकाली