हूँ अकेला ना जा
है अंधेरा ना जा
इक रात का है सफ़र
होने को है सहर
कुछ देर और ठहर
ना जा ना जा
हूँ अकेला हूँ अकेला
हूँ अकेला
हू ओ ओहो
सोचना क्या ना जा
जो भी होगा ना जा
हो तो नहीं
यूँ मगर
क्या होता मैं जो अगर
यह पल यहीं
उमर भर
ना जा ना जा
हूँ अकेला हूँ अकेला
हूँ अकेला
नींदों के माटटेनज़र हैं खवाब मगर
नींदों से बेवफा है आज नज़र
तू जो है साथ तो है नींद ज़हर
ना जा ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा ना जा
अब सुबह ना जा
यून बेवजह ना जा
तन्हा मुज़ेः षोडकर
रोशनी ओढ़ कर
शब गयी तू मगर
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जा ना जा
ना जाआ
ना ना ना ना ना जा
ना ना ना ना ना जा
ना ना ना ना ना जा
ना ना ना ना ना जा
ना ना जा ना जा
ना जा ना जा
हूँ अकेला हूँ अकेला