बीता हुआ पल कभी गुज़रता नहीं
वो सहमा हुआ सा बैठा रहता है
रास्ते के किसी पिच्छले मोड़ पर ज़िंदा
उसके भी जज़्बात होते है
और कुत्छ अरमान भी
गुजर तो मैं जाता हू
किसी मुसाफिर की तरह
और वो बीता पल वहीं
मेरी राह तकता किसी पेड़ की तरह
यह आवाज़ भी आइसे ही किसी पल की है
जो बैठा है कहीं इर्द गिर्द
मेरे पिट्चले मंज़िल के
मेरी जान कहीं भी जेया
मेरी जान कहीं भी जेया
बस संभाल के जाना
बस संभाल के जाना
यहीं पे खड़ा है घर तेरा
यहीं पे खड़ा है घर तेरा
आना दोबारा आना दोबारा आना दोबारा
मेरी पिट्चली मंज़िल जहाँ पे
मैं रुका था थोड़ी देर
और सोचा था के
ज़िंदगी यहनी रुक जाएगी
लेकिन शुरू होना मेरी किस्मत थी
और चलते रहना फ़ितरत
यह आल्बम यह नगमें
यह इसी रास्तें में मिले
कुत्छ खूबसूरत चीज़ें हैं
ज़रा देखे इनमें से कोई आपकी तो नहीं
आना दोबारा आना दोबारा आना दोबारा.