एक वक़्त था हँसे के लिए
ज़रूरते कितनी कम थी
और आज
यह फ़र्क जब महसूस होता है
यह मंज़िलों से मंज़िलों तक चलते हुए
मैने कितना कुच्छ पाया है
लेकिन खो दी सिर्फ़ एक चीज़ मासूमियत
उँचओ के ख्वाब थे
उँची थी सारी मंज़िले
और हर मंज़िलो पे
मिलती और सारी मंज़िले
उँचओ के ख्वाब थे
उँची थी सारी मंज़िले
और हर मंज़िलो पे
मिलती और सारी मंज़िले
मंज़िलों से मंज़िलों तक
भागते रास्ते
मंज़िलों से मंज़िलों तक
भागते रास्ते
इन रास्तो मैं खो गयी
मासूम मुस्कुराहते
मासूम मुस्कुराहते
लिखते तो पहले ही था
और आज भी लिखता हूँ
लेकिन आज कल सोचने लगा हूँ
लिखने से पहले के
चलेगा नहीं चलेगा
हिट होगा नहीं होगा
पहले मैं अपनी मर्ज़ी का राजा था
लिखता था अपने लिए
सिर्फ़ अपने लिए
जन्म लेते रोज नगमे
आसमान को देखकर
कागाज़ो पे रात बहती थी
साइटारे ओधकर
साम ढालना दिन का चलना
सब था मेरे वेस्ट
साम ढालना दिन का चलना
सब था मेरे वेस्ट
अब ना वो रात दिन
मंज़िले और रास्ते
मंज़िलों से मंज़िलों तक
भागते रास्ते
इन रास्तो मैं खो गयी
मासूम मुस्कुराहते
मासूम मुस्कुराहते
पहले कोई छ्होटी दोस्ती करता
भी तो किस लिए
क्या था मेरे पास
पर अब सच्चा दोस्ती का हाथ आयेज बढ़े
तो लगता है इसे क्या चाहिए मुझसे
यह क्यू दोस्ती करना चाहता है मुझसे
ह्म आज क्यू है मुस्कुरहत
जूथ लगती है बड़ा
आज क्यू है मुस्कुरहत
जूथ लगती है बड़ा
दोस्ती का हाथ भी
लगता है कुच्छ देने बढ़ा
आज क्यू है मुस्कुरहत
जूथ लगती है बड़ा
दोस्ती का हाथ भी
लगता है कुच्छ देने बढ़ा
हाथ दया आईने मैं
हाथ बया क्यू लगे
हाथ दया आईने मैं
हाथ बया क्यू लगे
यह आईना भी मूजखसे
कुच्छ है चाहता ऐसा लगे
मंज़िलों से मंज़िलों तक
भागते रास्ते
इन रास्तो मैं खो गयी
मासूम मुस्कुराहते
मासूम मुस्कुराहते