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रररा रा आरा
तुम्हें अपना बनाने का जुनून सर पे है कब से है
मुझे आदत बना लो एक बुरी केहना ये तुमसे है
तुम्हें अपना बनाने का जुनून
सर पे है कब से है सर पे है कब से है
जिस्म के समंदर में इक लहर जो ठहरी है
उसमें थोड़ी हरकत होने दे हो शायरी सुनाती इन
दो नशीली आँखों को मुझको पास आके पढ़ने दो
इश्क की ख्वाहिशों में
भीग लो बारिशों में आओं ना
तुम्हें पाकर ना खोने का जुनून
सर पे है कब से है
मुझे नजरों में रख लो तुम कहीं
कहना ये तुमसे है
तुम्हें अपना बनाने का जुनून
सर पे है कब से है सर पे है कब से है
रोकना नहीं मुझको जिद पे आ गई हूँ मैं
इस कदर दीवानापन चढ़ा
देखो ना यहाँ आके मेरा हाल कैसा है
टुटके अभी तक ना जुड़ा अब संभलना नहीं है
जो भी है वो सही है आओं ना
तुम्हें खुद से मिलाने का जुनून
सर पे है कब से है
मुझे रहने दे अपने पास ही
केहना ये तुमसे है
तुम्हें अपना बनाने का जुनून
सर पे है कब से है सर पे है कब से है