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दिल पे नहीं क़ाबु
कैसा ये जादू
ये मौसम का जादू है मितवा
न अब दिल पे क़ाबू है मितवा
नैना जिसमें खो गये
दीवाने से हो गये
नज़ारा वो हर सू है मितवा
हो ओ ये मौसम का जादू है मितवा
शेहरी बाबु के संग प्रेम गोरी गोरी, हे
ऐसे लगे जैसे चंदा की चकोरी
फूलों कलियों की बहारें
चंचल ये हवाओं की पुकारें
हमको ये इशारों में कहें हम
थमके यहाँ घड़ियाँ गुजारें
पेहले कभी तो ना हमसे
बतियाते थे ऐसे फुलवा
ये मौसम का जादू है मितवा, मितवा
ना अब दिल पे काबू है मितवा
नैना जिसमे खो गए (आ आ आ आ)
दीवाने से हो गए (आ आ आ आ)
नज़ारा वो हरसू है मितवा (आ आ आ आ)
सच्ची सच्ची बोलना भेद ना छुपाना, हे
कौन डगर से आये कौन दिशा है जाना
इनको हम ले के चले हैं
अपने संग अपनी नगरिया
हाय रे संग अनजाने का उस पर अनजान डगरिया
फिर कैसे तुम दूर इतने
संग आ गयी मेरे गोरिया
ये मौसम का जादू है मितवा
ना अब दिल पे काबू है मितवा