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साजन यह मत जानीयो तुम बिच्छुरे मोहे चैन
जैसे बन की लाकड़ी सुलगत हूँ दिन रैन
कजरे की बाती अँसुअन के तेल में
आली मैं हार गयी अखियन के खेल में
कजरे की बाती अँसुअन के तेल में
आली मैं हार गयी अखियन के खेल में
कजरे की बाती
चंचल से नैनों में काजल को आंज कर
बिखरी इन अलकों में रजनी को बाँध कर
सिंदूरी आँचल में तारों को टांक कर
अधरों के प्यालों में चुंबन को ढाल कर
अलका कर सबके मन प्रीत की गुलेल में
मारी ना जाओ कहीं अपने इस खेल में
सपने ही टूट गये इस ताल मेल में
आली मैं हार गयी अखियन के खेल में
कजरे की बाती
तन की सुराही में यौवन की हाला
चितवन में मदहोशी अंगों में ज्वाला
छल छल छल छलके जो मदिरा का प्याला
गोरी तू लागे है पूरी मधुशाला
नशा ही नशा है इस अंगूरी बेल में
प्याला और मदिरा इन दोनों के मेल में
बिरहा के फूल हैं जीवन की बेल में
आली मैं हार गयी अखियन के खेल में
कजरे की बाती
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ