कलियुग वेला पे यौवन चढो जब
तीन हुँ तीनों लोक ने शिव को पुकारो।
माँ गौरा शिव जी से बात करन को
एक दूजे के मुख मण्डल निहारो
करि विचार बोले शिव जी तब
प्राण प्रिये मृत्युलोक तिहारो
जाने जग महिमा गुरु जी की
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
बोली माँ शिव से सुनो त्रिपुरारी
धरा को द्वन्द आपहि संभारो
बोले शिव जी मधु मुस्काए तब
यही मत गौरा है आज हमारो
भारत वर्षे आए मेरे गुरु जी
डुगरी मे भयो है जन्म तिहारो
जाने जग महिमा गुरु जी की संगत
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
मस्तराम पिता जी गुरु जी के
सुरजीत कौर को माँ है पुकारो
07-जुलाई -1952गुरु जी ने अपने चरण डारो
जो जो बड़े तन ख्याति बड़ी मन
सबके पड़े है पुत्र हमारो
जाने जग महिमा गुरु जी की
शिव रूप लेकर गुरु जी पधारो
देख के अचरज गुरु जी के जब
मातृ-पिता गुरु नाम पुकारो
सरखा बिच अदृश्य गुरु जी भए जब
भक्तों ने जय-जय गुरुजी उचारो
बहने लगी गंगगुरु संगति की
लगने लगो चहुं ओर जयकारो
जाने जग महिमा गुरु जी की संगत
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
शिव रूप लेकर गुरु जी पधारो
कुछ वर्ष बीते संगति के जब
बड़े मन्दिर का निर्माण करायो
जो दुखियों आए परिजन के संग
गुरु जी ने सबको ही पल में संभारो
कष्ट मिटाये दुखिया तन के
भक्तों को गुरु जी को सहारो
जाने महिमा गुरु जी की संगत
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
शिव रूप लेकर गुरु जी पधारो
चाय और लंगर पाए जो भी पाए संगत
कट ज्ञाने कष्ट तन को सारो
आई वेला अब तो गुरु के गमन की
गुरुजी ने मन ही मन विचारो
31-मई-2007
महासमाधि को वक्त ना टारो
जाने महिमा गुरु जी की संगत
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
शिव रूप लेकर गुरु जी पधारो
जो बड़े मन्दिर जाए सांचे मन
गुरु जी है देते उसको सहारो
केस बीमारी छूटे है सबकी
गुरु जी के चरणो में माथ हमारो
गुरु जी स्तुति करे जब जो भी
सफल होते काज तुम्हारो
जाने महिमा गुरु जी की संगत
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
शिव रूप लेकर गुरु जी पधारो
अष्टक गुरु जी का पढ़े जो भी मन से
रोग और दोष मिट जाये हमारो
सब दुखियन के सहारे गुरु जी
मुनेंद्र प्रेम जी दास तिहारो
संजय नमन करे नतमस्तक हो कर
दोउ भक्त को देखो आप संभारो
जाने महिमा गुरु जी की संगत
शिव रूप लेके गुरु जी पधारो
शिव रूप लेकर गुरु जी पधारो