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अब उस हसीना की बाहों में तू है
जिसको चाहा था
बेइंतहां
अब उसकी रातों में तू है
ऐसी बेकरारी का
ये सिलसिला
उसके ख़यालों ने
ऐसा असर किया है
मैं तुझसे कहती भी क्या?
मांगी ज़मानत तो
हमको नहीं मिलेगी
इतनी कड़ी ये सज़ा
आशिक़ हमारा
और क़ातिल भी तू है
इस मोहब्बत पर
जैसा हसा
हम तो तुम्हारे हर
इशारे पे जी रहे थे
पर वो भी
काफ़ी ना था
तुम भी क्या याद रखोगे?
कितना जले हैं हम
तुम्हारे लिए
तुम भी क्या याद रखोगे?
कितना जले हैं हम
तुम्हारे लिए
तुम भी क्या याद रखोगे?
याद रखोगे! याद रखोगे!
हाँ तुम मुझे!
तुम भी क्या याद रखोगे?
याद रखोगे! याद रखोगे!
हाँ तुम मुझे!
तुम भी क्या याद रखोगे
याद रखोगे
क्या तुम मुझे?