नज़र है मेरी तू, है तू ही नज़ारा
ये क्या माजरा है बता
शायर बना है ये दिल आज कल जो
तू ही तो सारी वजह
ये कैसी नवाज़िश दिल पे हुई है
हुआ ख़ुशनुमा दिल मेरा
छू लेना मुझको निगाहों से तेरी
तू दरिया हूं मैं घाट सा
चढ़ा देना माही, तू रंग तेरा जैसे
तू सूरज हूं मैं रात सा
तू ही समंदर मेरा
है तू ही सफ़ीना मेरा
तुझपे जो ना मर सकूं
है ये कोई जीना भला
जो ग़ुम गर मैं जाऊं
तो मिल फिर मैं जाऊं
तेरी सांसों के दरमियां
नज़र है मेरी तू, है तू ही नज़ारा
ये क्या माजरा है बता
शायर बना है ये दिल आजकल जो
है तू ही तो सारी वजह
चंदन चंदन मैं तेनु
माथे पे सजावां
बन के कलावा तेरी कलाई च
लोक्कां दी नज़रां तों बचावां