घर की एकता, तेरी कृपा से बनी,
तेरा प्रेम है जो हमें जोड़े।
हम एक देह, एक आत्मा,
तेरे नाम से हम ना टूटे।
जब अहंकार आया दरवाज़े पर,
तेरी नम्रता बन गई ढाल।
जब झगड़े ने चीखा अंदर,
तेरी आवाज़ ने किया कमाल।
तेरा प्रेम है मजबूत दीवार,
हर दरार को भरता चला।
रिश्तों की दीवार गिरी नहीं,
क्योंकि तू हर ईंट में बसा।
बच्चों में तेरी शिक्षा है,
माता-पिता में तेरा धैर्य है।
हर सदस्य तेरा दर्पण बने,
तेरा नाम घर में गूंजे।
तेरी उपस्थिति से घर महकता है,
हर डर, हर दूरी पिघल जाती है।
तेरे प्रेम ने जोड़ा हर दिल को,
तू ही इस घर की नींव कहलाता है।
घर की एकता, तेरी कृपा से बनी,
तेरा प्रेम है जो हमें जोड़े।
हम एक देह, एक आत्मा,
तेरे नाम से हम ना टूटे।