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कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
कि जिंदगी तेरी जुल्फों की नरम छाँव में गुज़रने वाली पति
तो शादाब भी हो सकती थी
ये रंज-ओ-ग़म की सियाही जो दिल पे छायी है
तेरी नज़र की शुआओं में खो भी सकती थी
मगर ये हो ना सका और अब ये आलम है
कि तू नहीं, तेरा गम तेरी जुस्तजू भी नहीं
गुज़र रही है कुछ इस तरह ज़िन्दगी जैसी,
इसके किसी सहारे की आरज़ू भी नहीं।
ना कोई राह, ना मंजिल, ना रोशनी का सुराग
भटक रही है अंधेरों में जिंदगी मेरी।
इन्हीं अँधेरों में रह जाऊँगा कभी खो कर
मैं जानता हूँ मेरी हम-नफस, मगर यूँही
कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिये
के जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिये
तू अबसे पहले सितारों में बस रही थी कहीं
तू अबसे पहले सितारों में बस रही थी कहीं
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिये
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिये
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के ये बदन ये निगाहें मेरी अमानत हैं
के ये बदन ये निगाहें मेरी अमानत हैं
ये गेसुओं की घनी छाँव हैं मेरी ख़ातिर
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे बजती है शहनाई सी राहो मैं
के जैसे बजती हैं शहनाइयां सी राहों में
सुहाग रात है घूँघट उठा रहा हूँ मैं
सुहाग रात है घूँघट उठा रहा हूँ मैं
सिमट रही है तू शरमा के अपनी बाहों में
सिमट रही है तू शरमा के अपनी बाहों में
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है
के जैसे तू मुझे चाहेगी उम्र भर यूँही
उठेगी मेरी तरफ़ प्यार की नज़र यूँही
मैं जानता हूँ के तू ग़ैर है मगर यूँही
मैं जानता हूँ के तू ग़ैर है मगर यूँही
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है