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तुम और हम एक बंद कमरे में
तुम और हम एक बंद कमरे में
हाथ न लगाऊँ, कैसे? अरमान भी तड़पे ये
पास न बुलाए, पर तू घबरा के बढ़ते रह
थोड़ा और, थोड़े
अरमान बेचैन
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
अरमान बेचैन
अरमान बेचैन
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
अरमान बेचैन
तुझसे होके कितना दूर, रहता दिल में तेरे
दिल में मेरे, तू ही महबूब, तो क्या बिन मैं तेरे
संभाल लेना, दिल ये ज़िम्मे तेरे
लेता हिसाब क्यूँ तू दिल से मेरे
चाहूँ बीच हमारे बातें कम हों, छूना ज़्यादा
दिल में छू लूँ बातों से, हाथों से जिस्म छू न पाता
बस आवाज़ हो साँसों की, सुन
आहों की धुन
सुबह हम रास्ते जब हैं चलते हैं, लगता सूना रास्ता
तुम और हम एक बंद कमरे में
हाथ न लगाऊँ, कैसे? अरमान भी तड़पे ये
पास न बुलाए, पर तू घबरा के बढ़ते रह
थोड़ा और, थोड़े
अरमान बेचैन
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
अरमान बेचैन
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
अरमान बेचैन
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
अरमान बेचैन
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
तुम और हम एक बंद कमरे में रह जाएँ
कुछ कह पाएँ
कहना जो कह दूँ, और तू सह पाए
ख़फ़ा क्यूँ मुझसे रहके खुश तू रह पाए
पर अरमान ये नाज़ुक, छूते ही तू बह जाए
बेचैनियाँ
जब हो
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
(तुम और हम एक बंद कमरे में)
(हाथ न लगाऊँ)
(न लगाऊँ)
(न लगाऊँ)
(पर तू बढ़ते रह)