बातें अधूरी जो हैं अधूरी रहे
तो अच्छा है
दिल के क़रीब आके भी जो दूरी रहे
तो अच्छा है
कहने को कह भी दे हम, पर क्या फ़ायदा?
जो मज़ा ख़ामोशी में है बातों में कहाँ?
हो, दिल के जो हालात हैं वो आँखें करती बयाँ
तुम ना हो फिर भी जो लगे कि तुम हो इधर
तो अच्छा है
अंजने चेहरों में ढूँढे जो तुमको नज़र
तो अच्छा है
तमाम उम्र तेरा इंतज़ार करना है
फिर भी ना जाने क्यूँ दिल में उम्मीद सी है!
तू पास ना हो तो ये बेक़रार रहता है
ना जाने क्या पता कैसी दिल की लगी है!
सच में नहीं बस ख़्यालों में तुम
संग में रहो मेरे
बढ़ती हुई धड़कनों को जो थामे अगर
तो अच्छा है
उन क़दमों को रोकें जो जाएँ तेरी डगर
तो अच्छा है