फिर कहीं जो मिलें तेरे-मेरे रास्ते
बातें कुछ कर लेना उन दिनों के वास्ते
कल जो थे माना आज भी होंगी मुझसे कुछ शिकायतें
याद कर वो ख़ुशी जब हम साथ थे
दूरी ये क्यूँ रहे? (दूरी ये, दूरी ये क्यूँ रहे? क्यूँ रहे?)
ख़ामोशी क्यूँ सहें? (ख़ामोशी, ख़ामोशी क्यूँ सहें? क्यूँ सहें?)
दूरी ये क्यूँ रहे? (दूरी ये, दूरी ये क्यूँ रहे? क्यूँ रहे?)
ख़ामोशी क्यूँ सहें? (ख़ामोशी, ख़ामोशी क्यूँ सहें? क्यूँ सहें?)
तोड़ते हैं अनजाने में दिल सभी
टूटते हैं हमारे दिल भी कभी
बातें बनती-बिगड़ती
राहें ये जुड़ती-बिछड़ती रहेंगी
हो यारी जितनी पुरानी
उतनी ही राहें सुहानी रहेंगी
तो बता मुझे
दूरी ये क्यूँ रहे? (दूरी ये, दूरी ये क्यूँ रहे? क्यूँ रहे?)
ख़ामोशी क्यूँ सहें? (ख़ामोशी, ख़ामोशी क्यूँ सहें? क्यूँ सहें?)
दूरी ये क्यूँ रहे? (दूरी ये, दूरी ये क्यूँ रहे? क्यूँ रहे?)
ख़ामोशी क्यूँ सहें? (ख़ामोशी, ख़ामोशी क्यूँ सहें? क्यूँ सहें?)
कब कहाँ ले जाए हमें ज़िंदगी
किसी को पता नहीं, किसी को पता नहीं
कब कहाँ ले जाए हमें ज़िंदगी
किसी को पता नहीं, किसी को पता नहीं
राह जो भी दिखाए
ग़म या ख़ुशी में मुस्कुराता रहूँ
राहें जहाँ भी ले जाएँ
अपनी ही धुन में गुनगुनाता चलूँ
कैसे समझाऊँ तुझे
दूरी ये क्यूँ रहे? (दूरी ये, दूरी ये क्यूँ रहे? क्यूँ रहे?)
ख़ामोशी क्यूँ सहें? (ख़ामोशी, ख़ामोशी क्यूँ सहें? क्यूँ सहें?)
दूरी ये क्यूँ रहे? (दूरी ये, दूरी ये क्यूँ रहे? क्यूँ रहे?)
ख़ामोशी क्यूँ सहें? क्यूँ सहें? (ख़ामोशी, ख़ामोशी क्यूँ सहें? क्यूँ सहें?)