खुद से ही क्यूँ रहूँ मैं बेखबर
यादों में क्यूँ थम जाए ये सफर
लफ़्ज़ों में भी मैं कुछ ना कह सका
फ़ासले भी बातों से हैं खफा
दुआओं से भरे ये लम्हे कहाँ खो गए
क्यूँ तेरी ही राहों से अब ये फ़ना हो गए
कैसे और क्या है ये पल
सोचूँ बस जाना किधर
यादें ये थम जाएँ, हम तुम संभल जाएँ
यूँ ही तो पागल हो गया दिल दीवाना
तेरी आँखों में दिखता है खुदा
तेरी बातों में मिलता है जहाँ
क्यूँ मैं रहती हूँ खुद से लापता
तेरी यादों का दिल पे काफिला
दुआओं से भरे ये लम्हे कहाँ खो गए
क्यूँ तेरी ही राहों में अब ये फ़ना हो गए
कैसे और क्या है ये पल
सोचूँ बस जाना किधर
लम्हे ये थम जाएँ, हम तुम संभल जाएँ
यूँ ही तो पागल हो गया दिल दीवाना