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प्रिय भक्त जनों बोलिये शनिदेव महाराज की भक्तजनो आज हम आपको सूर्य पुत्र तथा कलियुग के न्यायाधीश कहलाने वाले छाया नन्दन शनि देव की कथा सुनाने जा रहे है, शनि देव की कथा श्रवण करने से साढ़े साती का प्रकोप आपकी राशि पर कभी भी दुश्वप्रभाव नही डालेगा वेदों के अनुसार देवी संज्ञा से सूर्य ताप सहन ना कर पाती है और अपनी परछायी को सूर्य के पास भेज देती है जिनसे शनि देव का जन्म होता है छाया के काले होने के कारण शनिदेव का रंग भी काला होता है, पुत्र को काला देख सूर्य देव क्रोधित हो जाते है और शनि को अपने पुत्र के रुप में ना अपनाते है,यह सुन शनि क्रोधित हो क्या करते है आईये कथा के माध्यम से सुनते है जय श्री शनिदेव की
हम छाया नन्दन शनिदेव की कथा सुनाते है,पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है,हम कथा सुनाते है
हम छाया नन्दन शनिदेव की कथा सुनाते है,पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है,हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान, सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण,ये शनि की कथा महान
फिर तो शनि ने सूर्य देव पर डाली अपनी नजर
रुके वही फिर सूर्य देव ना हिलते इधर उधर
सूर्य सारथी अरुण बेचारे नेत्र गवां बैठे
तेज हीन के बोले शनि हम छाया के बेटे
सूर्य का चक्कर रुक जाने से हुआ घोर अंधियार
सारी सृष्टि मे मच गयी थी फिर तो हाहाकार
सूर्यदेव को अपनी गलती समझ में है आयी
हाथ जोड़ मांफी मांगी फिर शनि ने दृष्टि हटायी
कोई भी पापी शनिदेव से बच ना पाते है, पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है, हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान, सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण,ये शनि की कथा महान
उज्जैन नगरी में पावन महाकालेश्वर स्थान
शिव के भक्त विक्रमादित्य जिनकी ऊँची शान
बड़े ही भक्त हुए है राजा शिव त्रिपुरारी के
चारों ओर ही चर्चें होते उन तप धारी के
दान पुण्य और पूजा पाठ वो करते जन सम्मान
स्वर्ग यात्रा कई बार कर पाया था सम्मान
राजा के दरबार में एक दिन बहस थी होने लगी
कौन बड़ा है नवग्रहों में चर्चा होने लगी
सभी ही पंडित सभी ग्रहों के गुण बतलाते है,पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है,हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान, सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण,ये शनि की कथा महान
बोलिये शनिदेव महाराज की जय दरबार में बैठा पहला पंडित बोला हे राजन वैसे तो सभी नवग्रह महान है किन्तु सूर्य सबसे ही बड़े है और महान भी जो जिसकी राशि में आ जाए वो मालामाल हो जाता है, तभी यह सुन दूसरा पंडित बोल पड़ा कि सोम देव सबसे महान है वो समस्त सृष्टि को शीतलता प्रदान करते है भक्त जनों का कल्याण भी करते है, तभी तीसरा ज्ञानी मंगल ग्रह को श्रेष्ठ बताने लगता है तथा चौथा पंडित बुध ग्रह को अति श्रेष्ठ बता उनका गुणगान करने लगता है और कहता है कि बुध जिसकी राशि में आ जाते है उनके घर में सुख सम्पत्ति आ जाती है, कष्ट नष्ट हो जाते है फिर पांचवां ज्ञानी क्या कहता है आईये देखते है कथा में
पांचवा ज्ञानी गुरु ग्रह का करने लगा गुणगान
गुरु के बिना ना सम्भव राजन इस सृष्टि पर ज्ञान
जो जन गुरु के श्री चरणों में ध्यान लगाता है
गुरु की दया से सुख पाकर ज्ञानी बन जाता है
छठवें ज्ञानी ने शुक्र का किया है फिर गुणगान
हे राजन ये नवग्रहों में है सबसे अधिक महान
जिसकी राशि में हे राजन करते ये प्रवेश
घर भर देते खुशियों से कट जाते सभी कलेश
दया के सागर भक्तों में ये ही कहलाते है,पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है,हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान,सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण,ये शनि की कथा महान
सातवा पण्डित बोला उठकर राहु केतु महान
सारे जगत में इनका तो होता है अति सम्मान
इनकी दया दृष्टि राजन जो जन है पाते
सुख सम्पत्ति पाता हर जन कष्ट है मिट जाते
आठवे नौवे पण्डित बोले शनि है अति महान
न्यायाधीश है कलियुग के इनको हे मिला वरदान
शनि देव के भक्त सभी सुख सम्पत्ति पाते है
जो करता अपमान शनि का वो बच नही पाते है
सूर्यदेव भी शनि को अपना शीश झुकाते है,पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है,हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान,सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण,ये शनि की कथा महान
भक्तों पंडितों के मुख से शनि की प्रशंसा सुन विक्रमादित्य बोल पड़े पंडितों आपको शर्म नही आती जो अपने पिता का आदर सम्मान करना नही जानता वो नवग्रहों में कैसे श्रेष्ठ हो सकता है,राजा के कटु वचन सुन शनि देव की आँखें क्रोध से लाल हो गयी,और वे राजा के समक्ष आए और उन्होंने राजा को उनकी राशि में प्रवेश कर सबक सिखाने की चेतावनी दी, फिर क्या शनि देव ने अपना प्रकोप दिखाना शुरु कर दिया,शनि के प्रकोप से बचने के लिए राजा ने शिव का तप किया किन्तु शिव राजा की कोई मदद ना कर सके,समय बीतता गया राजा का राज्य उनके शत्रुओं ने छीन लिया और राज्य से भी निकाल दिया आगे क्या हुआ आइये देखते है कथा के माध्यम से
शनिदेव ने राजा को है और भी सबक सिखाया
उनको दण्डित चन्द्र सेन राजा से करवाया
शनि के अन्दर बदले की ना अग्नि बुझपाई
एक तेली के घर राजा से नौकरी है करवाई
हार मान ली राजा ने हे शनि देव भगवान
मांफी मांग के शनि देव का करने लगे गुणगान
खुश होकर फिर शनिदेव ने उनको मांफ किया
अहंकार विक्रमादित्य का शनि ने साफ किया
राज्य दिला फिर शनिदेव वापस आ जाते है,पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है,हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान, सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण,ये शनि की कथा महान
शनिदेव ने राजन को फिर आकर समझाया
राजा का सारा सम्मान भी उनको है दिलवाया
बोले शनि अपमान जो करते उन्हें बताते है
अपनी कोप दृष्टि ये हम सबक सिखाते है
फिर से वो उज्जैन की नगरी हो गयी सुख सम्पन्न
खाली खजाने भर गए सारे राजा हुए प्रसन्न
शनिदेव ने अपना फिर बतलाया है स्थान
सिंगडापुर नगरी में हमारे भक्त धरेंगे ध्यान
सूर्यपुत्र को फिर तो राजन शीश झुकाते है, पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है, हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान, सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण,ये शनि की कथा महान
प्रिय भक्तों राजा विक्रमादित्य बड़े ही प्रेम भाव से शनिदेव भगवान का उपवास कर पूजा अर्चना करने लगते है तथा तेल, काले तिल,चढा कर शनि पाठ करते है धीरे धीरे शनि ने राजा विक्रमादित्य पर तथा उज्जैन राज्य पर अपनी कृपा की बरसात की।समस्त नगरी में शनिदेव की जय जयकार होने लगी, आईये चलते है कथा की ओर., उससे पहले मेरे साथ प्रेम से बोलिए शनिदेव महाराज की जय
उज्जैन राज्य में फैल गयी थी फिर तो खुशहाली
सारी नगरी हो गयी थी अब शनि कृपा वाली
शनिदेव ने अपनी कृपा सब पर है बरसायी
बीत गए थे दुख दर्द खुशहाली थी छायी
ऐसी ही कृपा हे भगवन भक्तों पर करना
रहूं कभी ना वंचित ऐसी कृपा तुम करना
शनिदेव को जो श्रद्धा से शीश झुकाता है
मन वांछित फल शनिदेव से वो जन पाता है
शनि की महिमा वेद पुराण हमको बताते है, पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है, हम कथा सुनाते है
शनिदेव के भक्त सभी बस रखना इतना ध्यान
ना हो जाए कभी भूल से थोडा भी अपमान
शनिदेव से छाया नन्दन बड़े दयालु है
भक्तों पर करते कृपा ये बड़े कृपालु है
सारी सृष्टि इनको अपना शीश झुकाती है
तीनो लोक इनकी दातारी के गुण गाती है
डी एस पल ने सुमिर गुरु ये कथा सुनायी है
मुनेन्द्र प्रेम जी सुमिर शारदा कलम चलायी है
हम दोनों भी शनि देव को शीश झुकाते है, पावन कथा सुनाते है
शनिदेव महाराज को हम सब शीश झुकाते है, हम कथा सुनाते है
ये शनि की कथा महान सुनने से हो कल्याण
सुनने से हो कल्याण ये शनि की कथा महान