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भक्तो जय श्री हरी आज मै आपको मोहनी एकादशी की व्रत कथा की महिमा को सुनाने जा रहा हूँ मोहनी एकादशी व्रत करने से जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है पापो का विलय होता है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है आइये कथा की ओर बढ़ते है बोलो जय श्री हरी जी की
कलयुग में उद्धार का तुमको मार्ग बताता हूँ पावन कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी का तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
पावन पतित महा व्रत का मै सार बताता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
कलयुग में उद्धार का तुमको मार्ग बताता हूँ में कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा कर ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा इनाम
मात सरस्वती के चरणों में लगा के अपना ध्यान
कथा लिखूं मै एकादशी की पावन पतित महान
सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नगरी
अति रमणीक स्थली थी ज्यों स्वर्ग से उतरी
खुशहाली से भरा राज्य था राजा था धृत नाभ
सारे नगर में हंसी ख़ुशी का फैला था उल्लास
उसी नगर में वैश्य एक था जो था बड़ा धनवान
उसके ह्रदय में बसते थे श्री विष्णु भगवान्
सुनो ध्यान से भक्तो आगे कथा बढ़ाता हूँ पावन कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी का तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा कर ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा इनाम
पांच पुत्रो का पिता वैश्य था गर्व की थी ये बात
हर दिन उसके घर होती थी खुशियों की बरसात
श्री विष्णु जी की भक्ति में डूबा रहता था
प्रतिदिन नियम से विष्णु जी की पूजा करता था
धर्म कर्म में आगे रहता करता प्रतिदिन दान
बड़ी अधर्मी निकली लेकिन उसकी बड़ी संतान
जुआ खेलना मदिरा पीना रोज का था ये काम
सुबह बिताये मदिरा घर में वैश्य के घर शाम
वैश्य के बेटे का तुमको इतिहास बताता हूँ पावन कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी की तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा कर ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
सारे नीच कर्म वो करता रखता साथ कुसंग
माता पिता और भाई सारे हो गए उससे तंग
बार बार उसको समझा के घरवाले गए हार
एक रोज फिर मात पिता ने मन में किया विचार
सीने पे पत्थर रख करके दोनों ने तत्काल
थोड़ा धन आभूषण दे के घर से दिया निकाल
कामी शराबी और तामसी घर से चला गया
माता पिता भाई से अपने लड़ के चला गया
इसके आगे क्या होता है वो बतलाता हूँ पावन कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी की तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा कर ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
मौज मनाई उस बेटे ने जब तक धन था पास
चंद दिनों में कर डाला था धन का सत्यानाश
बड़े ऐश में गुजरे कुछ दिन जब कुछ रहा ना शेष
अब क्या खाये कहाँ पे ठहरे चिंता हुयी विशेष
भूखा प्यासा रहने लगा ना पास रही कौड़ी
चोरी की लत लग गई उसको करने लगा चोरी
रात में जा के चोरी करता दिन में करता मौज
नारी मदिरा जुआ में डूबा रहता था हर रोज
पकड़ा गया जिस रोज हुआ क्या वो समझाता हूँ पावन कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी की तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
चोरी करते हुए एक दिन उसको पकड़ लिया
हाथ पांव जंजीरो में उसका जकड़ लिया
चार सिपाही खींच के उसको ले आये दरबार
राजा के आदेश पे उसको खूब लगाई मार
महाराज ने सजा सुनाई उसे तुरंत तत्काल
पहले मारा कोड़ो से फिर राज्य से दिया निकाल
राज्य से बाहर छोड़ आये किसी जंगल में जाकर
जिन्दा रहूँगा जंगल में अब कैसे क्या खाकर
सोच रहा था मन में यही मै सत्य बताता हूँ पावन कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी की तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
भूख लगे तो पशु पक्षी को मार मार खाये
रात ढले तो पेड़ के नीचे लेट के सो जाए
जिन्दा रहने की खातिर वो करता रोज शिकार
मन में सोचता था वो ऐसे जीना है बेकार
मिला शिकार उसे ना इक दिन भूखा सोया वो
अपनी करनी के ऊपर जी भर के रोया वो
सारी रात उसे नींद ना आई बैठा रहा उदास
अगले दिन जा कर के पंहुचा कौण्डिल्य ऋषि के पास
क्या बोला वो ऋषि राज से वो बतलाता हूँ पावन कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी की तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
ऋषि के आश्रम पहुंचे के पापी जोड़ के बोला हाथ
ऋषि राज जी मैंने किये है बड़े बड़े अपराध
पापी बड़ा हूँ नीच बड़ा हूँ करता हूँ स्वीकार
सिर के ऊपर पाप उठाकर जीना है दुश्वार
बहने लगी आँखों से धारा मुँह से ना फूटे बोल
कैसे मिले पाप से मुक्ति पाप किये अंतोल
सच बोलूं मै ऋषि राज कर्मो का सताया हूँ
कोई उपाए बता दो मुनिवर शरण में आया हूँ
क्या कहते है ऋषि राज वो सुनो सुनाता हूँ मै तो कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी की तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
मोहनी एकादशी जो बैसाख में पड़ती है
उसका व्रत करने से हर दुःख ब्याधा कटती है
शुक्ल पक्ष में पड़ती है एक उत्तम एकादशी
पाप मुक्त करती है ये सर्वोत्तम एकादशी
श्रद्धा से व्रत पालन करना मन से करना ध्यान
श्री हरि जी की कृपा से होगा हर कल्याण
मोहनी एकादशी का व्रत करता है वैश्य कुमार
पाप दोष से हो जाता है पापी का उद्धार
अंत गया वो स्वर्गलोक मै सत्य बताता हूँ मै तो कथा सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी की तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
एकादशी की पावन महिमा सबसे उत्तम है
उत्तम कहना अनुचित होगा अति सर्वोत्तम है
जो भी एकादशी के व्रत का पालन करता है
सुख वैभव धन धान्य से उसका आंगन भरता है
उसके ऊपर श्री विष्णु की कृपा होती है
संकट आता नहीं ख़ुशी की वर्षा होती है
मोहनी एकादशी की भक्तो महिमा है न्यारी
किस्मत में जकड़ी जंजीरे कट जाए सारी
कथा लिखे सुखदेव डी. एस. पाल गाके सुनाता हूँ मै गाके सुनाता हूँ
मोहनी एकादशी का तुमको कथा सुनाता हूँ मै कथा सुनाता हूँ
यह कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान