क्या खोया क्या पाया है
बस नफ़रत का साया ये
बेफ़िज़ूल, बेफ़िज़ूल
सरहद पे जो खड़े
बेवजह ही वो लड़े
बेकसूर बेफ़िज़ूल क्यूँ
सुन ले अर्ज़ी ये, अर्ज़ी ये
आख़िर तेरी मर्ज़ी है
इस मिट्टी को लहू से कर दे रिहा
उमीदों को दिलो से फिर मिला
क्यूँ बहा है इतना खून बेफ़िज़ूल
रंग एक ही है हम क्यूँ गये भूल
क्यूँ बहा है इतना खून बेफ़िज़ूल (हो हो हो)
रंग एक ही है हम क्यूँ गये भूल (हो हो हो हो हो हो)
फासलें ना मीटे
बढ़ गयी नाराज़गी क्यूँ
इम्तिहान ले रही ज़िंदगी हो हो हो
कोरे ही रह गये
काग़ज़ अपने करीब जिन पर
निखरी थी एक नयी दोस्ती
पोछ्ले ले तू ये आँसू
बहे थे जो मासूम चेहरों से कभी
प्यार की ये सुबह को
रहमत की पनाह दो ज़िंदगी
ओह ओ ओह ओ ओह ओ ओह ओ ओह ओ ओह ओ
ओह ओ ओह ओ ओह ओ ओह ओ ओह ओ
क्यूँ बहा है इतना खून
बेफ़िज़ूल, बेफ़िज़ूल
रंग एक ही है
हम क्यूँ गये भूल, गये भूल
क्यूँ बहा है इतना खून
बेफ़िज़ूल, बेफ़िज़ूल (हो हो हो)
रंग एक ही है (हो हो हो)
हम क्यूँ गये भूल, गये भूल (हो हो हो)
ओह ओ ओह ओ ओह ओ
बेफ़िज़ूल, बेफ़िज़ूल बेफ़िज़ूल (ओह ओ ओह ओ ओह ओ ओह ओ ओह ओ)