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मैं हूँ माखन चोर,
कन्हैया ब्रज का शोर।
ना तलवार, ना ताज मेरा,
बस बंसी और ग्वालों का जोर।
गोपियाँ बोले - "छोरी हुई!"
मैं बोला - "अरे तू भी हुई!"
हां, मटकी फोड़ी मैंने हँस के,
तेरे दिल में भी घुस के!
मैं आया जैसे चोरी की हवा,
बिना बताये ले जाऊँ सब रस।
गायें भी बोले - मोर है राजा,
बंसी की तान - ब्रज का बस।
कौन है? माखन चोर!
कौन है? नंद का लाल!
कौन है? रास का राजा!
बोलो! बोलो! जय कन्हैया लाल!
कौन है? माखन चोर!
कौन है? नंद का लाल!
कौन है? रास का राजा!
बोलो! बोलो! जय कन्हैया लाल!
आँखों में काजल वाली बोले,
कन्हैया तू दिल को डोले!
मैं बोला - मैं चोर नहीं,
बस प्रेम की राह में खोले!
माखन? हां चुराया बहुत,
पर चुराया सबसे दिल का सुख।
भक्ति की गलियों में चलता,
ना राजा, ना रंक - मैं बस तुझमें अंक।
कभी गोकुल, कभी वृंदावन,
जहाँ राधा - वहाँ मेरा मन।
ना सिकंदर, ना कोई बादशाह,
मैं हूँ रास का असली रास्ता।
कौन है? माखन चोर!
कौन है? नंद का लाल!
कौन है? रास का राजा!
बोलो! बोलो! जय कन्हैया लाल!
कौन है? माखन चोर!
कौन है? नंद का लाल!
कौन है? रास का राजा!
बोलो! बोलो! जय कन्हैया लाल!