चाहने वाले
बहुत होंगे तेरे
पर मैं कर बैठा हूँ
तुमसे दिल लगाने का ही
सारा इंतज़ाम
करते हैं इंतज़ार बहुत
कि मिल जाए मेरी इन आँखों
को भले ही छोटी सी झलक
रहना दूर
रहना दूर
माना हूँ मैं शर्मीला
पर तुमसे मिलने तो आऊँगा ज़रूर
रहना दूर
रहना दूर
अच्छा हूँ नहीं मैं पहली मुलाक़ातों में
मेरा क्या कसूर
नज़रें झुकी
जब तुमसे मिली
आँखें बयां करती मेरी
तेरे संग ही देखूँ जहाँ
ज़रूरत किसी और की नहीं
हो मशहूर तभी हो दूर
माना हूँ मैं शर्मीला
पर तुमसे मिलने तो आऊँगा ज़रूर
रहना दूर
रहना दूर
अच्छा हूँ नहीं मैं पहली मुलाक़ातों में
मेरा क्या कसूर
अच्छा हूँ नहीं मैं पहली मुलाक़ातों में
मेरा क्या कसूर
अच्छा हूँ नहीं मैं पहली मुलाक़ातों में
मेरा क्या कसूर