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Сингл / Трек
हो निकले थे जब हम घर से
अपने गाँव से नगर से
प्यार जो बरसे, याद आते हैं
लिपट के हमको मैया
बोली थी “जाओ सिपहिया”
वो पल हमें भैया
याद आते हैं
अपने आँगन चौबारे
वो गलियाँ और गलियारे
बचपन के दोस्त सारे
याद आते हैं
लहराता कोई आँचल
वो आँखें और वो काजल
हम जिन पर थे पागल
याद आते हैं
हो निकले थे जब हम घर से
अपने गाँव से नगर से
प्यार जो बरसे
याद आते हैं
हो लिपट के हमको मैया
बोली थी “जाओ सिपहिया”
वो पल हमें भैया
याद आते हैं
दिवाली की सारी जगमग
वो होली में चलना डगमग
वो मस्ती की रातें थीं
वो मस्ती के दिन
जिसे देखकर दिल धड़के
वो कितनी भी हम पर भड़के
मगर चैन हमको कब था उसे देखे बिन
उसे देखे बिन, उसे देखे बिन
वो प्यार के सच्चे नाटक
वो शादी में बजती ढोलक
गीत पुराने अब तक
याद आते हैं
गाँव के गीत सुहाने
चाहे कितने हों पुराने
हमको जाने-अंजाने
याद आते हैं
हो निकले थे जब हम घर से
अपने गाँव से नगर से
प्यार जो बरसे
याद आते हैं
हो लिपट के हमको मैया
बोली थी “जाओ सिपहिया”
वो पल हमें भैया
याद आते हैं आ आ आ आ आ आ