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सुन्दरतर पिनाकधर हर
सुन्दरतर पिनाकधर हर
सुन्दरतर पिनाकधर हर
सुन्दरतर पिनाकधर हर
गङ्गाधर गजचर्माम्बरधर
गङ्गाधर गजचर्माम्बरधर
चन्द्रचूड शिव शंकर पार्वती
रमणा निनगे नमो नमः
दर पे आके, सर झुका के हर व्यथा के हल
मैं माँगूँ तुमसे, भोले, थामे तुमको ये नज़र
अगर गिरा मैं कल, लगाना हाथ तू अटल
तेरी ही वजह से मेरी साँसें रही चल
दर पे आके, सर झुका के हर व्यथा के हल
मैं माँगूँ तुमसे, भोले, थामे तुमको ये नज़र
डगर मिला ना कोई तेरे बिना, महाकाल
अकेला ही चला हूँ तुझे आशाओं में भर
तू नाचता कैलाश में, तू गाने में भी रहता
दीवाने के हृदय में, तू ज़ुबान पे भी रहता
तू काशी में समाया, केदार के तू पर्वतों पे
जहाँ जलती काया, तू मसान में भी रहता
तूफ़ान में भी रहता, रहता है एकांत में
काल-घूँट पी लिया था, वो भी एक साँस में
नीलकंठ मेरे, कुछ माँगा नहीं वापसी में
देव-रस प्याला सारों में ही बाँट के
आपकी हथेली में है सारा ही ब्राह्मांड
ताज का वो क्या करेंगे, सर पे उनके चाँद
विषाद की घड़ी में जो ना साथ छोड़े तेरा
आदिनाथ नाम है, जो हौसले का बाँध
नूर तेरे सेवकों में, जैसे चमके चंद्रमा
तू कहे तो डाल दूँ मैं काग़ज़ों में ध्वंस आज
मंच पास मेरे तेरी ही कृपा से
हाथों में लिखाई, मुझे दे दी जैसे चंद्रहास
तेरे बिना, भोले, लग रहा है रंज पास
तेरे बिना जीतूँ कैसे दिल के द्वंद्व, नाथ?
शंखनाथ करो, मेरे कर्मों के हे सारथी
हाथों में लिखाई, मुझे दे दी जैसे चंद्रहास
सुन्दरतर पिनाकधर हर
सुन्दरतर पिनाकधर हर
गङ्गाधर गजचर्माम्बरधर
गङ्गाधर गजचर्माम्बरधर
चन्द्रचूड शिव शंकर पार्वती
रमणा निनगे नमो नमः
नूर तेरे सेवकों में, जैसे चमके चन्द्रमा (सुन्दरतर)
तू कहे तो डाल दूँ मैं काग़ज़ों में ध्वंस आज (पिनाकधर हर)
मंच पास मेरे तेरी ही कृपा से (सुन्दरतर)
हाथों में लिखाई, मुझे दे दी जैसे चंद्रहास (पिनाकधर हर)
तेरे बिना, भोले, लग रहा है रंज पास (सुन्दरतर)
तेरे बिना जीतूँ कैसे दिल के द्वंद्व, नाथ? (पिनाकधर हर)
शंखनाथ करो, मेरे कर्मों के हे सारथी (सुन्दरतर)
हाथों में लिखाई, मुझे दे दी जैसे चंद्रहास (पिनाकधर हर)
मैं तो वैरागी हूँ
ना सम्मान का मोह, ना अपमान का भय
ना शत्रु, ना मित्र, ना कोई अपना, ना पराया
ना इस संसार से कुछ लेना, ना कुछ देना