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यो!
आदि शंकर की वाणी,
नई बीट पे पुरानी कहानी।
सुन... ध्यान से सुन!
भज गोविंद, नाम ले गोविंद,
सच्ची राह यही है, छोड़ दे मोह-माया बंधु।
भज गोविंद, भज गोविंद,
आख़िर में काम आएगा बस गोविंद!
जब तक साँस है, सब तेरा साथ,
साँस रुकते ही खाली हो जाता हर एक हाथ।
धन का लालच, शोहरत का खेल,
अंत में खाली - यही है असली मेल।
विद्या, किताबें, शास्त्र सब यार,
मौत के वक़्त न देंगे सहारा एक बार।
डुकृञ-करन मत गिन रे भाई,
नाम जप ले, यही है सच्चाई!
भज गोविंद, नाम ले गोविंद,
सच्ची राह यही है, छोड़ दे मोह-माया बंधु।
भज गोविंद, भज गोविंद,
आख़िर में काम आएगा बस गोविंद!
बचपन खेलों में, जवानी प्रेम में,
बुढ़ापा चिंता में, फंसा हर क्षण में।
किसी को भगवान का ध्यान नहीं,
इस जंजाल से निकलेगा ज्ञान यहीं।
पुनः पुनः जन्म, पुनः पुनः मौत,
गर्भ का अँधेरा - यही है खौफ़।
मुरारी का नाम ही पार कराए,
दिल के मंदिर में वही बस जाए।
सुन भाई, सुन बहना!
जब टाइम ख़त्म, शोहरत भी ख़त्म,
बचता है सिर्फ़ विश्वास और रिदम।
भक्ति में ही असली फ़्रीडम,
सब मिलकर बोलो - भज गोविंदम्!
भज गोविंदम् भज गोविंदम्
भज गोविंद, नाम ले गोविंद,
सच्ची राह यही है, छोड़ दे मोह-माया बंधु।
भज गोविंद, भज गोविंद,
आख़िर में काम आएगा बस गोविंद!
पैसा, शोहरत, अहंकार - सब धोखा,
आख़िर में सच्चा वही जो है ऊपरवाला।
गोविंदा... गोविंदा...
भज गोविंदम्...