बजे 12, अकेला लेटा मुस्कुरा रहा
उम्र सी गी मेरी 11
घर के क्लेश, ड्रीम्स कराँ चेस
हर भेष नूं बदल आज़मा रहा
क्या नज़ारा, मेरे सामने हर दिन का ना पूछ
देखूँ काँच में तो 5 मुझे दिखें मेरे रूप
है हौसले अटूट, मेरी माँ भी सबूत
मेरे बाप दे नाल मैं शायद आज भी अछूत
4 यार मेरी असली कमाई
टकराई हर मोड़ में तो कितनी हरजाई
कमज़ोर जज़्बात दा मैं किता भरपाई
छाप हंजुआँ दी गानें 'च पे जानी सुनाई
ना गवाई कदी जीने दा तू मौका
मेनू माँ मेरी बोली जीना लगदा है ओखा
आना एक दिन हवा दा तेज़ झोंका
और छिन जाना ज़िंदगी दा तोहफा
तब से अब तक
खुद ही के दम पे, तुम्हें ना खबर
कब से कब तक
थका मैं, थक्के मेरा क्या मकसद
खर्चे सर पर
इन्हें बताके ना पड़ेगा फ़र्क अब
कितने ज़ख्म
सभी छुपाके फिर मेहनत है डबल
बनूँ बेशर्म
लगी तो लगी ना पैसों की तड़प
गिनूँ मैं नंबर
कैसे भी करूँ मैं आना है 1 पर
वी कीपिन इट शम्भर
कभी ना बनूँ मैं किसी का चमच्च
मरते दम तक
खुद के पैरों पे करूँ मैं संघर्ष
कितने फक्ड अप
दिल में दबाके बात को मत रख
कहते सब जन
किसको पूछूँ मैं कितने क्वेश्चन
कितनी टेंशन
सबकी ज़िंदगी सबके सर पर
भगवान के दर्शन
इंसानियत भगवान से बढ़कर
किसको पूछता क्या
तू झाँक ले अपने आप के अंदर
दिल में सब के लिए जगह
तू अपनी आँख तो बंद कर
किसको कहना क्या
तू पहले अपने आप को चेक कर
खुद से बात तो करके देख
जवाब है खुद के अंदर