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अति पावन अति पतित सुहानी कलयुग की सुनो मधुर कहानी
जो झूठा सो ऊँचा होगा, सच वाला ही निचा होगा
करेगा जो जितनी भी बुराई उसी की होगी जग में बढ़ाई
भूल के मत अच्छाई करना, होगी ये दुखदायी वरना
कोई तुझे एक चाटा मारेमार के उसको वही गिराए
दूजा गाल न आगे करना, सिखले बंदे लड़ना मरना
झूठ फरेब सिखले बंदे दया धरम के कर तू धंदे
पेहेन गेरुआ बनजा साधु, प्रतिदिन जायेगा पूजा तू
बनजा तू खुनी अपराधी सिख धरम की सौदे बाजी
संसद में तू नेता होगा, बहुत बड़ा अभिनेता होगा
भाई की तुम टांग खींचना बहनो का अधिकार छीनना
मात पिता को घर से भगाना, पीके दारु मौज उड़ाना
चेहरे ऊपर लगा मुखौटा बिन पेंदे का बनके लोटा
जिधर देखना पलड़ा भारी, पांव पकड़ करलेना यारी
आन बान सम्मान भूलजा मान और अपमान भूल जा
तभी तो तू धनवान बनेगा, बहुत बड़ा इंसान बनेगा
निर्धन से तू नफरत करना मक्कारो की इज्जत करना
यही समय का भी कहना है, ये कलयुग है यही करना है
जिसको भी तुम दोगे सहारा बनेगा दुश्मन वही तुम्हारा
जिसको राह दिखाओगे तुम, चोट उसी से खाओगे तुम
ज्यादा बक बक न तू करना परछाई पे भी शक करना
जो भी तेरे साथ चलेगा एक न एक दिन घात करेगा
देखा न मिर्ची का पौधा रहा मसाले बेच
बाहर चोर है घूमते मंदिरो में ताले देख
गीत बेचे संगीत बेचके सीधी सादी प्रीत बेचके
बहुत बड़ा बन गया गवैया, सिसक रही है शारदा मैया
खेत न देखा कभी धान का चावल बेचे बड़े ब्रांड का
धुप में कोई करे जुताई, बैठ छांव कोई करे कमाई
अध्यापक जो है सरकारी बहुत बड़ी उनको बीमारी
बैठ क्लास में सो जाते है, मोटी सैलरी वो पाते है
बारह साल की उम्र है जिसकी पूरी टिकट लगेगी उसकी
रेप करे जब सतरा वाला, है नाबालिग भोला भाला
कोई बच्चा करे मजदूरी तो उसकी है उम्र अधूरी
बच्चा काम फिलम में पाए, बहुत बड़ा स्टार कहाये
लड़का चाहे कही भी जाये आधी रात को लौट के आये
बेटी अगर बाजार भी जाये, घर में सबसे मार वो खाये
कोर्ट कचहरी जो जाता है कही का न वो रह जाता है
बिना फैसला मर जाता है, बिक उसका फिर घर जाता है
काली लगती है घरवाली लगे फूलझड़ी सबको साली
चाहे लाख बुरा हो साला, बहुत बड़ा है किस्मत वाला
मांस न खाये शनिवार को कल खाएंगे रविवार को
घर घर की है ये नौटंकी, कहते है सुखदेव है सनकी
बहुत बड़ी है कलयुग वाणी ज्ञान भरी है अति कल्याणी
कलयुग महिमा जो गायेगा, सीधे स्वर्ग में वो जायेगा
आज को कल पे टाल दे कल परसो पे टाल
काम न कर तत्काल तू तभी गलेगी दाल