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रात भर हिज्र में
क्या क्या हुआ क्या ना हुआ
रात भर हिज्र में
क्या क्या हुआ क्या ना हुआ
सुबह तक बेड में साँस थामे हुए
अपने इनबॉक्स का चेहरा तकता रहा
रात भर
एक ही मैल आने की उम्मीद में
जुगनुओं की तरह जलता बुझता रहा
रात भर
रात भर हिज्र में
क्या क्या हुआ क्या ना हुआ
लिख लिख के text delete क्र दिए
अनजाने tweet retweet क्र दिए
दुश्मनो की post दिल से की पसंद
अपने नाम से तुझे पुकारते रहे
रात भर हिज्र में
रात भर
क्या क्या हुआ क्या ना हुआ
दिल हे बेतुका हे गुस्ताख़ भी
जो न मिल सके बस मांगता वही
जो भी पास हे वो कम पसंद हे
दिल में जिसके वास्ते जिए मरे उसी पे
रात भर हिज्र में
बेतरह दिल क्या करे क्या न करे