यह तन काचा कुंभ है, लिया फिरै था साथि।
यह तन काचा कुंभ है, लिया फिरै था साथि।
ढबका लागा फुटि गया, कछू न आया हाथि॥
कबीरा कछू न आया हाथि॥
यह तन काचा कुंभ है, लिया फिरै था साथि।
ढबका लागा फुटि गया, कछू न आया हाथि॥
कबीर कहते हैं की आदमी का शरीर
कांच के घड़े के जैसा नाजुक है
जो एक धोकर लगते ही टूट सकता है
और मोह माया धरी की धरी रह सकती है
मरने के बाद कोई कुछ साथ नहीं लेकर जायेगा