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हम श्री कृष्ण के जन्म की लीला आज दिखाते है
कृष्ण का जन्म दिखाते है
श्री कृष्ण जी जेल में जन्मे वो बतलाते है
कृष्ण जन्म दिखाते है
कंस राज की बहन की सारी व्यथा सुनाते है
क्यों वासुदेव श्री कृष्ण को गोकुल छोड़ के आते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
कृष्ण जन्म की कथा सुनाऊ सुनो लगाके ध्यान
मथुरा में अवतरित हुए जब श्री विष्णु भगवान्
समझ सका है कौन आज तक तकदीरो का खेल
मिलते मिलते महल दो महले मिल जाती है जेल
वासुदेव संग ब्याह कराके चली बहन ससुराल
कंस राजा रथ हाँक रहा था हो करके खुशहाल
तभी गगन में बादल गरजे आई फिर आवाज
जिसके लिए तू प्रसन्न रो रहा है कंश राज तू आज
इसी के कोख में मौत है तेरी सत्य बताते है
श्री कृष्ण के जन्म ली लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
आकाश वाणी सुनकर वासुदेव कंस राजा वहां उपस्थित मंत्री वासुदेव देवकी कंस राजा वहां उपस्थित मंत्री संतरी सैनिक दास दासियाँ सब के सब हैरत में पड़ जाते है एक दूसरे की तरफ देखने लगते है कंस को तो मानो कानो के परदे ही फट गए थे फिर से आवाज आती है कंस जिस बहन को उसके ससुराल छोड़ने जा रहा है इसी की कोख से जन्म लेने वाली आठवीं संतान तेरा वध करेगी कंस राजा है ह्रदय तीव्र गति से गतिमान हो जाता है
सुन करके आकाश वाणी को हुआ कसं हैरान
मेरी मौत की दाती देवकी बनेगी हे भगवान्
कंस ने सोचा मन में अपने कौन सा करूँ उपाय
बांस रहे ना बने बांसुरी छुटकारा मिल जाय
गुणा भाग कर अपने मन में कंस ने किया विचार
उतर गया रथ से नीचे और लिया खींच तलवार
बहन देवकी मरने के लिए हो जा तू तैयार
मेरे शत्रु की जननी बनेगी दूंगा तुझको मार
वासुदेव जी हाथ जोड़ उसको समझाते है सारी बात बताते है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
वासुदेव कंस के आगे हाथ जोड़ के देवकी के प्राणो की भीख मांगते है देवकी असहाय सी अपने भाई की देख जा रही है ,उसको इस बात का बड़ा दुःख है की मै ही अपने भाई की मृत्यु का कारण बनूंगी हे भगवान् कैसी किस्मत है मेरी कंस ने देवकी का वध करने के लिए तलवात तान रखी है वासुदेव जी विनती करते है हे कंस राजा अपनी बहन को हत्या का पाप अपने सर पर मत लो
वासुदेव जी बोले कंस से सुनो कंस महाराज
अपने पुत्रो की तुम्हे सौपने का वचन दे रहा आज
हम दोनों की पैदा होंगी जितनी भी संतान
तुम्हे सौप दूंगा मै लाके बात लो मेरी मान
औरत का वध करके अपने सर पर ना लो पाप
दयावान गुणवान बड़े ही महाराज है आप
कंस राज की समझ आ गई वासुदेव की बात
वापस मोड़ लाया रथ उसने उनके साथ
आगे क्या करता है पापी ये समझाते है हम समझाते है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
देवकी और वासुदेव को कारागार में डलवा देता है और सख्त पहरा बिठा देता है सैनिको को आदेश देता है की इन दोनों की खबर हमको इतना कह के कंस चला जाता है देवकी वासुदेव और दोनों कारागार को ही अपना महल मान लेते है
पहला गर्भ कर लिया धारण बहन देवकी ने
वासुदेव के कान में कर दी खबर देवकी ने
खुश होने के बदले दोनों रह जाते है सन्न
कई दिनों तक खाया ना गया उन दोनों से अन्न
कंस राज को दिया था जो वो वचन आ गया याद
सोपूँगा संतान तुम्हे पैदा होने के बाद
खबर हो गई कंस राजा को गर्भ धारण की
बात याद आ गई कसं को मौत के कारण की
पहले पुत्र का जन्म हो गया वो दिखलाते है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
कंस को जैसे ही पता चला की देवकी ने पुत्र को जन्म दिया है तुरंत ही कारागार में पहुंच जाता है और देवकी की गोद से बच्चा छीन लेता है देवकी कंस के पैरो में गिर जाती है रोते हुए कहती है भैया आपका दुश्मन तो मेरा आठवां बच्चा है ना ये तो पहला बेटा है ये तो निर्दोष है भैया इसे मत मारो कंस सोच में डूब जाता है देवकी सही कह रही है मेरा शत्रु तो इसका आठवां पुत्र है इसे मार के पाप का भागी क्यों बनू उसे छोड़ देता है चला जाता है
कंस राज सिंहासन बैठा लगा हुआ दरबार
नारद जी आते है लगाते है कंस की जय जयकार
धन्य हो गए हम नारद जी दर्शन हमें हुआ
बोली श्री नारद जी कैसे आना यहाँ हुआ
नारद बोले कंस राज से तुम हो बड़े नादान
मती तुम्हारी मारी देख के हम है बड़े हैरान
अष्ट पखुंड़ि कमल पुष्प फिर उसे दिखाते है
दोनों तरफ गिनती देखो आठ ही आते है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
कंस हैरान परेशान नारद जी के कथन का अर्थ नहीं पा रहा था ,बोला हे मुनि श्रेष्ठ विस्तार से समझाये तब नारद जी बोले जिस प्रकार इस कमल पुष्प की पखुडियो कही से गिनो पर आठ ही आएंगी ठीक उसी प्रकार देवकी के पुत्रो की गणना कही से भी करी आठ ही आएगी पता नहीं वो अथवा पहला बन के जन्म लेले और तुम्हारा काम तमाम कर दे नारद की बात कंस के समझ में आ गई थी नारद जी नारायण नारायण करते हुए अंतर्ध्यान हो जाते है
क्रोध में भर के कंस राज फिर पंहुचा कारागार
छीन के पुत्र बहन का अपनी दिया है उसको मार
तड़प के रह गए पति पत्नी वो बहे नैन से नीर
मार दिया बहना के शिशु को उठी कलेजे पीड़
इसी तरह से एक एक कर मारे बालक सात
वध करता जब मासूमो का नहीं कांपता हाथ
सुख गए वासुदेव देवकी बन गए नर कंकाल
अपने भांजो का मामा ही बन बैठा है काल
पति पत्नी दिन रात जेल में नीर बहाते है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
कुछ दिनों बाद देवकी आठवां गर्भ धारण करती है ये सूचना कंस के को जैसे ही मिलती है उसे साक्षात् मृत्यु नजर आने लगती है चारो दिशाएं घूमती हुयी प्रतीत होती उसके कानो में ये आकाश वाणी का एक एक वाक्य गूंजने लगता है कंस सैनिको को लेकर रथ पर सवार हो कर उस जेल में पहुँचता है जहाँ वासुदेव और देवकी कैद है
कसं राज घबराया हुआ सा जेल में आता है
सारे पहरेदारो को अपना हुकुम सुनाता है
हाथ पाँव में इन दोनों के डाल दो तुम जंजीर
आधा भोजन आज से देना थोड़ा देना नीर
हर फाटक पर ताला लगा दो बढ़ा दो पहरेदार
खड़े रहो दिन रात हाथ में लेकर के हथियार
इन दोनों की हमें सूचना हर दिन भिजवाना
याद रहे आज्ञा है मेरी भूल नहीं जाना
सुनो ध्यान से हम तुमको आदेश सुनाते है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
सारे पहरेदार को समझा के कंस चला जाता है पति पत्नी जंजीरो में जकड़े हुए है दोनों बेबाद असहाय बस जीवन के दिन काट रहे है धीरे धीरे वो दिन भी आ जाता है जब देवकी के उदर में प्रसव वेदना शुरू हो जाती है भादो मास की अँधेरी रात है बादल गरज रहे है काला स्याह अँधेरा विराजमान है रिमझिम रिमझिम बरसात शुरू हो चुकी है सातो फाटकों के ऊपर ताले लगे है हर फाटक के बाहर चार चार सैनिक मुस्तैदसे पहरा दे रहे है
कारागार में भर जाता है एक दिव्य प्रकाश
दिव्य पुंज एक जोत आ गई देवकी जी के पास
देवकी जी के उदर के ऊपर लुप्त हो जाती है
हैरान बड़े वासुदेव देवकी समझ ना पाती है
टूट गई हथकड़ी बेड़ियां टूट गए ताले
गहरी नींद में डूब गए है सब पहरे वाले
सारे फाटक खुल जाते है भक्तो अपने आप
जेल से बाहर जाने का सब हुआ रास्ता साफ़
श्री हरी जी श्री कृष्ण बने जेल में आते है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
श्री विष्णु भगवान् ने कृष्ण के रूप में अवतार ले लिया है बोलो जी श्री विष्णु भगवान् की है पुत्र का सुंदर रूप देख के माता पिता मन्त्र मुग्ध हो जाते है सूर्य चन्द्रमा जैसा तेज चन्द्रमा के समान गोल मटोल चेहरा देख के दो पल के लिए वो अपना सारा दर्द भूल जाते है अगले ही पल कसाई कंस का डरावना रूप उनकी आँखों के सामने उतर जाता है पुत्र की प्राण रक्षा के लिए देवकी ने कहा हे स्वामी इस बालक को गोकुल में नंद बाबा के घर छोड़ आओ फाटक खुल चुके है हमारी बेड़ियाँ टूट चुकी है पहरेदार सो चुके है सब भगवान् की मर्जी से ही हो रहा है वासुदेव जी ऐसा ही करते है
लेके टोकरी उसमे लिटा के वासुदेव महारज
अपने पुत्र के प्राण बचाने निकल पड़े है आज
सोये है सैनिक खुले है फाटक बरस रही बरसात
आधी रत का पहर डराये काली काली रात
सिर पर अपने लिए टोकरी पहुंचे यमुना तीर
तीव्र वेग से प्रलय मचाये यमुना जी का नीर
यमुना माता उफ़न रही है उतर गए वासुदेव
मन ही मन वासुदेव जी बोले दया करो महादेव
वासुदेव यमुना के बीच में चलते जाए है
श्री कृष्ण की लीला जन्म की लीला हम बतलाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान
यमुना जी श्री कृष्ण के चरण छूने के लिए व्याकुल है बढ़ती जा रही है बढ़ती जा रही है जब वासुदेव जी सर तक डूब जाते है तो कृष्ण भगवान् अपना एक पांव टोकरी बाहर लटका देते है यमुना जी चरण स्पर्श कर शांत हो जाती है जल स्तर घट जाता है वासुदेव जी शकुशल पार हो जाते है
नंद रानी सो रही पलंग पर बच्ची रही है खेल
श्री कृष्ण टोकरी में आये तोड़ ताड़ के जेल
लला उठा के धरा धरा बगल में लली को लिया उठाये
वासुदेव आनन् फानन जेल में पहुंचे जाए
लली को लेके माँ देवकी ने सीने से लिया लगाय
पांव में बेदी हाथ हथकड़ी अपने आप लगा जाय
लगा गए ताले हर फाटक पर उठ गए पहरेदार
बच्चे की किलकारी सुनके मच गया हाहाकार
कथा लिखी सुखदेव ने काला गाके सुनाते है
श्री कृष्ण के जन्म की भक्तो गाथा गाते है
हम कथा सुनाते है
ये कथा है बड़ी महान सब सुनो लगा के ध्यान
इस कथा की है पहचान मिले मुँह माँगा वरदान