मंदिर था
राम का
काफ़िर के
काम का
बाबर ने
कह डाला
ढाँचा
हराम का
प्रतिमा को
गाड़कर
शिवलिंग
उखाड़कर
चल दिया
बाबर फिर
सीने को
तानकर
गुम्बद में
सिमटी
मीनारों में
लिपटी है
उजड़ी सी
दिखती है
मूरत सभी
(मूरत सभी)
(मूरत सभी)
अतीतो से
बाबर के
किस्से
मिटायेंगे
मंदिर जहां पर था
वहीं पर बनायेगे
मथुरा कान्हा की
और काशी भी लाएंगे
मंदिर जहां था
वहीं पे बनायेगे
हर
हर
महादेव ।।
शिव
शम्भू
और
ढांचे के
टूटने का
न मुझे कोई
खेद है
न कोई पश्यताप है
ना कोई
प्रायश्चित है
मैं कहता हूँ
6 दिसम्बर 1992
की घटना
राष्ट्रीय गर्व
का विषय है
(हर हर महादेव)
बिगड़ी है
मंदिर की
सूरत यहां
गुम्बद के
नीचे है
मूरत यहां
हरियाली
कैसे हो
भगवा के बिन
जब चंदा ने
ढक डाला
सूरज यहां
मज़हब की छाया है
मज़हब की माया है
गुम्बद के नीचे क्यों
मंदिर छुपाया है
रण है ये
शुद्धिकरण भी तो बाकी है
घबराओ न ये तो
पहली ही झांकी है
पहली ही झांकी है
मथुरा कान्हा की और
काशी भी बाकी है
घबराओ न ये तो
पहली ही झांकी है
पहली ही झांकी है
हर हर महादेव ।।
शिव
शम्भू