खामोशियाँ आवाज़ हैं
तुम सुनने तो आओ कभी
छूकर तुम्हें खिल जाएँगी
घर इनको बुलाओ कभी
बेक़रार हैं बात करने को
कहने दो इनको ज़रा
खामोशियाँ, तेरी-मेरी खामोशियाँ
खामोशियाँ, लिपटी हुई खामोशियाँ
क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआ
जहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआ?
मेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआ
बताऊँ तुम्हें क्या, मेरे साथ क्या-क्या हुआ
Hmm, खामोशियाँ एक साज़ है
तुम धुन कोई लाओ ज़रा
खामोशियाँ अल्फ़ाज़ हैं
कभी आ, गुनगुना ले ज़रा
बेक़रार हैं बातें करने को
कहने दो इनको ज़रा
खामोशियाँ, तेरी-मेरी खामोशियाँ
खामोशियाँ, हाँ, लिपटी हुई खामोशियाँ
खामोशियाँ, तेरी-मेरी खामोशियाँ
खामोशियाँ, लिपटी हुई खामोशियाँ, हाँ