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वक्त का ये परिंदा रुका है कहां
मैं था पागल जो उसे बुलाता रहा
चार पैसे कमने मैं आया सेहर
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
वक्त का ये परिंदा रुका है कहां
मैं था पागल जो उसे बुलाता रहा
चार पैसे कमने मैं आया सेहर
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
वक्त का ये परिंदा रुका है कहां
लौटता था मैं जब पाठशाला सा घर
अपने हाथो से खाना खिलाड़ी थी मान
रात अपनी ममता के आंचल कथा
थपकी देके मुझे सुलती मा
सोच के दिल में एक तीस उठाती रही
रात भर दर्द मुझे जगत रहा
चार पैसे कमने मैं आया सेहर
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
वक्त का ये परिंदा रुका है कहां
सब की आंखों में अंशु छलक आए थे
जब रावण हुआ था सेहर के लिए
कुछ ने मांगी दुआए के मैं खुश रहूं
कुछ ने मंदिर में जाकर झलके देये
एक मैं बनुगा बड़ा आदमी
ये तशवूर उन्हे घुड़ घुड़ता रहा
चार पैसे कमने मैं आया सेहर
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
वक्त का ये परिंदा रुका है कहां
मां ये लिखता है हरबार खात में मुझे
लौट आ मेरे बेटे तुझे है कसम
तू गया जबसे परदेश बेचन हूं
नींद आती नहीं भुख लगती है कम
कितना चाहा ना रौ मगर क्या करूं
खत मेरी मां का मुझे रूलता रहा
चार पैसे कमने मैं आया सेहर
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
वक्त का ये परिंदा रुका है कहां
मैं था पागल जो उसे बुलाता रहा
चार पैसे कमने मैं आया सेहर
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा
गांव मेरा मुझे याद आता रहा