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लला ला लला ला ला लला लालला
लालला ला लल्ला लल्ला लालला लाल ला लल्ला लल्ला लालला लालला लालला
देखता ना, देखताना, देखताना, देखते, देखताना, देखताना
दिखता ना, दिखता ना, देखताना
कैसा है तू? कैसे हैं सब? पूछे खैरियत, पर देखे हैसियत सब
पता चला सिर्फ पैसों से रिश्ते हैं, तो अब मेरे सिर्फ पैसों से रिश्ते हैं
हां, मैंने जीत देखी, हां मैंने हार देखी
टेढ़ा बनके चलना पड़ता, वरना नेकी मार देगी
सड़कों पे मार देखी, अपनों में खार देखी
कत्लेआम की खबरें, अक्सर कब्रें तो आम देखी, देखी साफ़ सीढ़ी
बातें लिखूं साफ़ सीधी, किसी ने भी नहीं सुनी यहाँ मेरी आप बीती
रिश्तों में राजनीति, किसे बचाई? दाँत के हिस्से न खाक मिली
किस्तों में हार मिली
देखी कितनी शक्ल पल में बदल गई, मेरे सीने में क्यों होती हर पल हलचल
हर पल चंचल मन करे भगदड़
अब दिल मेरा खाली घर लगे, कंटर घुमानी
मैं दुनिया जहानों में कभी, क्योंकि पहले से ही मैंने देख लिया सब शायद
पूरा वक्त भी दिखा के जाएगा, एक जादू तो खाली दस्तक, गिन हो जाएंगे सब गायब
हे खुदा, मुझे क्या हुआ, क्यों लगता ये बेगाना
तू बता, मैं हूँ कहाँ, मंजिल की राह दिखलाना
देखता ना, देखता ना, देखता ना, यहाँ अपनों में अपना कोई दिखता ना
दिखता ना, देखता ना, दिखता ना, साला सच्ची में सच्चा कोई रिश्ता ना
देखता ना, देखता ना, दिखता ना, यहाँ अपनों में अपना कोई दिखता ना
दिखता ना, देखता ना, दिखता ना, साला सच्ची में सच्चा कोई रिश्ता ना
देखता ना, देखता ना, दिखता ना, देखता ना, दिखता ना, देखता ना
देखता ना, देखता ना, दिखता ना, देखता ना, दिखता ना, देखता ना
आंसू तो रोज़ आए, पर कोई ना पहुंच पाए
बोलूँ दिल की बात, पर दिल तक नहीं यह पहुँच पाए
तुक्के तो बहुत खाये, वो तो रोज़, सारे अपना सोचे
तू अपनों को सोचता है
क्यूं दूँ मैं घरवालों को दोष, दोस्त थे मेरा रोजगार
रोज़ अफ़सोस में हूं, उनपे बोझ, मैं कोसता खुद को बहुत
जेलों से भी ज्यादा लोगों के मन में है चोर
वो देखें कपटी, आहो नाड़ा, कब खींचे लंगोट
जाना कहां सूझता भी नहीं, भूखे पेट, नंगे पाँव, तो कोई थूकता भी नहीं
सवाल का जवाब देने से बने करोड़पति, लेकिन हम जैसों को कोई पूछता ही नहीं
बिना ताने खाए, मिलती है तालियां भी ना, मिलती कामियाबी तो ये देखें खामियां भी ना
काफी गलतियाँ भी की, गलती से थी काबिली मैं
ये दुनिया एक किताब, बातें किताबी, ये चुनौतियां हैं लोग
है क्या इसमें कोई शक
रोज़ बोलूं भगवान से, enough is enough
काश मिले होते कम कमरे, हमें भी कोई मिले होते हमदम रे
घुटते हैं अंदर ही अंदर, अब छुपते हैं मुझको ये बंद कमरे
मैं सो पाऊँ कभी चैन से, ऐसे भी दिन दिख लाना
खो जाऊँगा भीड़ में, तू हाथ थाम लेगा ना
देखता ना, देखता ना, देखता ना, यहाँ अपनों में अपना कोई दिखता ना
दिखता ना, देखता ना, दिखता ना, साला सच्ची में सच्चा कोई रिश्ता ना
देखता ना, देखता ना, दिखता ना, यहाँ अपनों में अपना कोई दिखता ना
दिखता ना, देखता ना, दिखता ना, साला सच्ची में सच्चा कोई रिश्ता ना
अपनों को देखा, अपनों से लड़ते, तो अपना है कौन? आया एक सवाल
गैरों को देखा, मैंने जख्मो को भरते, तो अपना है कौन? फिर आया एक सवाल