इश्क़ की दुनिया में क्यूँ ਗਲੀਆਂ ਸੁੰਨੀਆਂ ਵੇ?
मुश्किल ये रास्ता है, ਤਾਂ ਵੀ ਮੈਂ ਚੁਣਿਆ ਵੇ
निकलो तुम ख़ाब से, हक़ीक़त बन जाना
क्यूँ भागो ज़ेहन में तुम? थोड़ा सा थम जाओ ना
वो जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए
वो इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए
जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए
इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए
दिन जब लगने लगे छोटे-छोटे
आँखें जब खुल जाएँ सोते-सोते
बे-फ़िक्री में कहाँ होती है मोहब्बत
डर हो दिल को, हो ना जाए टोटे-टोटे
उसमें क्या ख़ास होगा अगर
उसका एहसास हर किसी से हो जाए
वो जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए
वो इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए
जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए
इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए
जवानी में अगर ना टूटा दिल तो
बाग़ है इश्क़ पे, ये कोई बात ना अच्छी
सूरतें अच्छी लेकर घूमते हो जो
इश्क़ ने कभी किसी की ज़ात ना पूछी
वो दर्द क्या मेरा है बना
जिसकी दवा हर हकीम से मिल जाए
वो जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए
वो इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए
जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए
इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए
(जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए)
(वो इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए)
(जाम-जाम क्या, जो नशा ना चढ़ाए)
(इश्क़-इश्क़ क्या, जो पागल ना कर पाए)